किसानों की कर्ज माफी समस्या का समाधान नहीं : फडनवीस


मुंबई। किसानों के कर्ज माफ कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। किसानों की सुविधाओं पर विचार करना चाहिए। यह कहना है महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस का। वे विधानसभा में किसानों से संबंधित पूछे गए प्रश्न का जवाब दे रहे थे।
जानकारी के अनुसार उन्होंने बताया राज्य के किसान ३४ हजार करोड़ के कर्जदार हैं। ये उन इलाकों के किसान हैं, जिन इलाकों में िंसचाई की सुविधा नहीं है। विधानसभा में सीएम ने कहा कि राज्य में वर्ष २०१५ के दौरान ३२२८ किसानों ने आत्महत्या की है। विपक्ष द्वारा किसानों की कर्ज माफी की मांग का जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि कर्ज माफी किसानों की आत्महत्या रोकने का आधार नहीं है। पिछले अनुभव को देखते हुए सरकार किसानों की कर्ज माफी के स्थायी हल के पक्ष में है। नागपुर, वर्धा और बुलढाना जिला बैंक कर्ज नहीं दे रहे थे। हमने इन बैंकों को पुनर्जीवित करने के लिए ५२४ करोड़ रुपये दिया है। खरीफ फसल में ५६ लाख किसानों को कर्ज मुहैया कराए गए।
अगर ऐसा होता है तो वेंâद्र ने वर्ष २००८ में राज्य के किसानों की ६९१० करोड़ की कर्ज माफी की थी। इसके अगले वर्ष राज्य में ३१४१ किसानों ने आत्महत्या किया। उन्होंने कहा कि जब तक हम िंसचाई का स्थायी हल नहीं निकालते, तब तक किसानों की आत्महत्या रोकना मुाqश्कल है। क्योंकि तब तक हमें कर्ज देना पड़ेगा। हम ऐसे विकल्प की तलाश में हैं, जो एक आर कर्ज खत्म होने के बाद दोबारा किसानों को कर्ज की जरूरत न पड़े।
५ लाख, ३३ हजार किसानों को ३५०४ हजार करोड़ रुपये का फसल कर्ज पुनर्गठन के जरिए राहत दी गई। सीएम ने कहा कि किसानों को बिजली, पानी और ऊर्जा पंप देकर मजबूत किया जा सकता है। कृषि पंपों के लिए एक बार ८२१ करोड़, २७० करोड़ और ५८१ करोड़ रुपये दिए गए हैं। अब तक १ लाख, ६९ हजार, ७८२ कृषि पंपों को बिजली उपलब्ध कराई गई है। विदर्भ के अनुशेष के मुद्दे पर सीएम ने कहा कि वर्ष २०१२-१३ में ८७६ करोड़, २०१३-१४ में ८८१ करोड़, वर्ष २०१४-१५ में १००० करोड़ और वर्ष २०१५-१६ में २०३६ करोड़ रुपये अनुशेष उपलब्ध कराया गया है।