कांग्रेस गंवा सकती है राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी का रुतबा


नई दिल्ली । वर्ष २०१४ के लोकसभा चुनावों में सबसे कम सीटें जीतने का खराब रिकार्ड बनाने वाली कांग्रेस द्वारा वर्ष २०१६ में संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में भी सबसे बड़ी पार्टी का रुतबा खोने के आसार हैं। आने वाले वर्ष में २० राज्यों की ७४ राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से २२ सीटों पर कांग्रेस के सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है लेकिन जिन राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं वहां विधानसभा में कांग्रेस की ाqस्थति इतनी मजबूत नहीं है कि वह इन सभी २२ सीटों पर फिर से जीत हासिल करे।
विभिन्न विधानसभाओं की मौजूदा ाqस्थति पर नजर डाली जाए तो कांग्रेस के इन २२ सीटों में से सिर्पâ ११ पर ही जीतने के आसार हैं। लिहाजा राज्यसभा में ६७ सीटों वाली कांग्रेस ५६ पर आ सकती है जबकि दूसरी तरफ भाजपा के १५ सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और भाजपा इन १५ सीटों पर दोबारा जीत हासिल करने के अलावा कुछ अन्य सीटों पर भी जीत हासिल कर सकती है।
फिलहाल राज्यसभा में भाजपा के ४८ सदस्य हैं और २०१६ में यह आंकड़ा ५० से पार हो जाएगा तथा राज्यसभा में भाजपा और कांग्रेस के बीच सदस्यों का अंतर या तो बहुत कम हो जाएगा या भाजपा राज्यसभा में भी कांग्रेस के बराबर पहुंच जाएगी। कांग्रेस को आंध्र प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र में सीटों का नुक्सान होना तय है। चुनाव के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से राज्यसभा के लिए नामांकित किए गए ५ सदस्यों का कार्यकाल भी इस वर्ष समाप्त होगा। ये सदस्य भी सरकार की सिफारिश पर नामांकित किए जाएंगे जिससे भारतीय जनता पार्टी सम?थत राज्यसभा सदस्यों की संख्या राज्यसभा में कांग्रेस से भी ज्यादा होने की उम्मीद है।
इस वर्ष होने वाले राज्यसभा के चुनाव के चलते राज्यसभा में भी वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) बिल के पास होने के आसार बढ़ जाएंगे। फिलहाल सरकार इस मामले में कांग्रेस के रहमो-करम पर है और सदन की मौजूदा ाqस्थति में कांग्रेस के समर्थन के बिना इस कानून को पास करवाना नामुमकिन है लेकिन चुनाव के बाद सरकार के पास राज्यसभा में भी इतने सदस्यों का समर्थन आ जाएगा कि सरकार कांग्रेस के बिना भी संसद का संयुक्त सत्र बुला कर जी.एस.टी. बिल के लिए दो-तिहाई बहुमत का जुगाड़ कर सकेगी क्योंकि इस चुनाव के दौरान भाजपा की राज्यसभा में ताकत बढ़ेगी ।
महाराष्ट्र में ४ जुलाई को राज्यसभा की ६ सीटों पर चुनाव होंगे। इनमें से ३ सीटों पर कांग्रेस, १ सीट पर एन.सी.पी. और १-१ सीट पर भाजपा एवं शिवसेना का कब्जा है लेकिन पिछले वर्ष आए विधानसभा चुनावों के नतीजों से महाराष्ट्र में कांग्रेस और एन.सी.पी. को नुक्सान होना तय है। इस राज्य से भाजपा की राज्यसभा सीटें निाqश्चत तौर पर बढ़ेंगी।
पंजाब में राज्यसभा की ७ सीटें हैं और इन सातों सीटों पर २ चरणों में ८ अप्रैल तथा ७ जुलाई को चुनाव होंगे। इनमें से ३-३ सीटें कांग्रेस और अकाली दल के पास हैं जबकि १ सीट पर भाजपा का कब्जा है। वर्ष २००७ के मुकाबले २०१२ में विधानसभा में भाजपा कमजोर हुई है, लिहाजा भाजपा को अपना एक सदस्य राज्यसभा भेजने के लिए अकाली दल के सहारे की जरूरत पड़ेगी।
राजस्थान में ४ सीटों पर ४ जुलाई को राज्यसभा के चुनाव होंगे। इनमें से २ सीटों पर कांग्रेस, १ पर भाजपा और १ पर आजाद उम्मीदवार का कब्जा है लेकिन २०१४ में राजस्थान विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली बढ़त का फायदा पार्टी को होना तय है। कांग्रेस इस राज्य में अपनी दोनों सीटें खो सकती है।
उत्तर प्रदेश में खाली होने जा रही ११ राज्यसभा सीटों पर ४ जुलाई को चुनाव होने हैं। इनमें से ६ सीटें बसपा के पास हैं जबकि ३ पर सपा और १-१ सीट पर कांग्रेस एवं भाजपा का कब्जा है। आने वाले चुनावों में बसपा को नुक्सान होना तय है क्योंकि विधानसभा में बसपा की ताकत कम है हालांकि कांग्रेस और भाजपा को ज्यादा नफा-नुक्सान नहीं होगा लेकिन राज्यसभा में सपा की ताकत जरूर बढ़ जाएगी।
२ भागों में विभाजित हो चुके आंध्र प्रदेश की कुल ६ राज्यसभा सीटों पर जून में चुनाव होंगे। इनमें से आंध्र प्रदेश में ४ और तेलंगाना में २ सीटों पर चुनाव होने हैं। फिलहाल इन ६ सीटों में से ३ कांग्रेस, २ टी.डी.पी. और १ भाजपा के पास है लेकिन पिछले वर्ष के विधानसभा चुनावों के दौरान तस्वीर पूरी तरह से पलट चुकी है और सियासी समीकरण भी कांग्रेस के पक्ष में नहीं है। हालांकि यहां भाजपा भी बहुत फायदे में नहीं है लेकिन कांग्रेस अपनी सीटें खो सकती है और इन पर टी.डी.पी. तथा वाई.एस.आर. कांग्रेस का कब्जा हो सकता है।
बिहार में ७ जुलाई को खाली होने जा रही राज्यसभा की ५ सीटों पर जे.डी.यू. का कब्जा है। पिछली बार इन सीटों पर जे.डी.यू. को भाजपा का समर्थन मिला था लेकिन इस बार ये सीटें जे.डी.यू. और राजद में बंटने के आसार हैं क्योंकि विधानसभा में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद की ताकत नीतीश कुमार की जे.डी.यू. के मुकाबले ज्यादा है। राज्य में कांग्रेस और भाजपा को इस वर्ष न कोई फायदा होगा और न ही नुक्सान होने के आसार हैं।
तमिलनाडु में खाली होने वाली सीटों की संख्या ६ है। इनमें से ३ सीटों पर ए.आई.ए.डी.एम.के., २ सीटों पर डी.एम.के. और १ पर कांग्रेस का कब्जा है। राज्यसभा चुनावों की तिथि २९ जून है। तमिलनाडु में मार्च से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी है, लिहाजा राज्यसभा में चुनावी जीत इन विधानसभा चुनावों के नतीजों पर निर्भर करेगी। यदि जयललिता अपनी बढ़त बनाने में कामयाब रही तो तमिलनाडु में अम्मा की पार्टी के उम्मीदवार ज्यादा जीत सकते हैं।