कर्मचारियों को बढ़े वेतन का आधा हिस्सा करना होगा निवेश!


– दो साल तक निवेश जरूरी, ११ साल बाद मिलेगा पैसा
नई दिल्ली। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की तैयारी में जुटा वित्त मंत्रालय सरकारी खजाने को अतिरिक्त बोझ से बचाने के लिए एक अलग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों को वेतन बढ़ोतरी का आधा हिस्सा बैंक वैâपिटलाइजेशन बांड्स में निवेश करना होगा। दो साल तक निवेश जरूरी होगा और यह पैसा ११ साल बाद आपको मिलेगा। बांड की रकम का उपयोग बैंकों को पूंजी उपलब्ध कराने में होगा। देश में ५० लाख वेंâद्रीय कर्मचारी हैं। इन्हें मान लें कि २ लाख रुपए भी एरियर मिलता है और ये आधा निवेश करते हैं तो सरकार के पास पांच हजार करोड़ आ जाएंगे। ५२०० से २०,२०० रुपए वेतन पाने वाले कर्मचारी व पेंशनभोगियों को योजना में शामिल होने या न होने की छूट होगी। इससे ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को बढ़ोतरी का ५० प्रतिशत बैंक री-वैâपिटलाइजेशन बॉन्ड्स में करना होगा निवेश।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि बैंकों को यह रकम एक स्पेशल बैंक वैâपिटलाइजेशन पंâड के जरिए दी जाएगी, जो बैंकों की ओर से जारी परपेचुअल नॉन-रिडीमेबल प्रिफरेंस शेयरों में निवेश करेगा। सरकार ८, ९, १० और ११ वर्षों बाद कर्मचारियों को रकम का भुगतान करेगी। असल में सातवां वेतन आयोग लागू होने से सरकारी खजाने पर काफी बोझ पड़ेगा। १ जनवरी २०१६ से इसे लागू करने पर सरकार को ४० से ५० हजार करोड़ रुपए सलाना अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ेगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार सरकारी बैंकों को अगले चार वित्त वर्षों में १.८ लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी चाहिए। इसमें से सरकार ७०,००० करोड़ रुपए देगी। इस बजट में २५,००० करोड़ का प्रावधान है। प्रस्ताव के मुताबिक बांड्स मेच्योर होने पर ही पेमेंट की नौबत आएगी, जिससे सरकार पर मौजूदा वित्त वर्ष में केवल ब्याज भुगतान की जिम्मेदारी बनेगी।