कपड़ा मंत्रालय ने कड़े मानकों पर िंचता जताई


नई दिल्ली।पर्यावरण मंत्रालय के ताजा प्रस्ताव पर कपड़ा मंत्रालय ने गंभीर िंचता जताई है। उसने प्रस्ताव की समीक्षा की मांग करते हुए आशंका प्रकट की है कि इसके लागू होने पर कई यूनिटें बंद हो सकती हैं। पर्यावरण मंत्रालय ने करीब-करीब सभी टेक्सटाइल यूनिटों के लिए उनके यहां से निकलने वाले पानी में मिले कचरे (एफ्लुएंट डिस्चार्ज) को शून्य के स्तर पर लाने का प्रस्ताव किया है।
कपड़ा सचिव एसके पांडा ने पर्यावरण मंत्रालय को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मानक काफी कड़े हैं। जीरो लिाqक्वड डिस्चार्ज स्टैंडर्ड पर दबाव बनाने से उद्योग पर संकट आ जाएगा। तकरीबन सभी टेक्सटाइल यूनिटें बंद होने की कगार पर खड़ी हो जाएंगी। इससे बड़ी संख्या में लोग रोजगार गंवा सकते हैं।मानक उन सभी टेक्सटाइल प्रोसेिंसग यूनिटों पर लागू होंगे जहां से रोजाना २५ किलोलीटर से ज्यादा पानी छोड़ा जाता है।
कपड़ा मंत्रालय की दलील है कि घरेलू प्रोसेिंसग उद्योग कमोबेश असंगठित है। इसमें छोटी और मध्यम आकार की यूनिटें शामिल हैं। प्रस्तावित मानक न केवल पूंजी निवेश के मामले में कठोर हैं, बाqल्क इसे पूरा करने के लिए ज्यादा खर्च की भी जरूरत होगी। घरेलू उद्योग पहले ही इस कदम पर िंचता जाहिर कर चुका है। उसने पर्यावरण संबंधी प्रस्तावित मानकों की समीक्षा करने के लिए अनुरोध किया है। निवर्तमान सचिव पांडा मानते हैं कि चरणबद्ध तरीके से नियमों को लागू किया जा सकता है। इस मुद्दे पर कपड़ा मंत्रालय उद्योग प्रतिनिधियों, कपड़ा अनुसंधान संगठनों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ बैठक कर चुका है।