उद्योगों से होने वाले प्रदूषण की हर घंटे की होगी निगरानी


नई दिल्ली । विभिन्न उद्योगों से होने वाले प्रदूषण की २४गुणा७ वास्तविक निगरानी एनडीए सरकार द्वारा उठाया गया एक प्रमुख क्रांतिकारी कदम है। इससे पहले नमूना लेने और प्रयोगशाला में परीक्षण करने की पद्धति अपनाई जाती थी, जो अपर्याप्त थी क्योंकि यह २४ घंटे के भीतर प्रदूषण के स्तर का पता नहीं लगा पाती थी। स्थिति की ऑनलाइन निगरानी के साथ हालात बिल्कुल बदल गए हैं और इससे निरंतर निगरानी की जा सकती है। अब उद्योग पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप नए उपकरण लगवाने के लिए कदम उठा रहे हैं। इन ऑनलाइन आंकड़ों का कानूनी प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने के लिए सरकार कानून में आवश्यक बदलाव भी लाएगी।- प्रकाश जावड़ेकर
वर्ष २०१५ में १७ श्रेणियों के अंतर्गत अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले ३१४५ उद्योगों को २४गुणा७ निरंतर प्रवाह/ उत्सर्जन प्रणालियों की स्थापना के लिए नोटिस जारी किये है। जिनमें से १४७५ पहले ही इन उपकरणों को स्थापित कर चुके हैं और ८०५ उद्योग इस प्रक्रिया को मार्च, २०१६ के अंत तक समाप्त कर लेंगे। इस तरह मार्च के अंत तक २२८० उद्योग २४गुणा७ निगरानी प्रणालियों से लैस होंगे। ३२१ उद्योग इस समय में बंद किए जा चुके हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी किये गए हैं कि केवल इन उपकरणों की स्थापना के बाद ही उन्हें दोबारा खोला जा सकें। १४१ उद्योगों को बंद करने के आदेश जारी किये गए हैं और शेष ४०३ उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। २४गुणा७ निरंतर निगरानी प्रणाली के दायरे में उत्सर्जन के मानक जैसे पीएम (पर्टिकुलेट मैटर), एसओ२ (सल्फर डाई-ऑक्साइड), एनओ२ (नाइट्रोजन डाई-ऑक्साइड), सीओ (कार्बन मोनो-ऑक्साइड), अमोनिया आदि तथा प्रवाह संबंधी मानक जैसे प्रवाह, पीएच, बीओडी (बायो कैमिकल आक्सीजन डिमांड), सीओडी (कैमिकल आक्सीजन डिमांड), टीएसएस (टोटल सस्पेंडिड सॉलिड), अमोनिकल नाइट्रोजन आदि। १७ श्रेणियों के अंतर्गत ११०१ इकाइयों के साथ सीपीसीबी और एसएमएस अलट्र्स के साथ डाटा कनेक्टिवीटी स्थापित की जा चुकी हैं और जब भी १५ मिनट से ज्यादा समय के लिए मानकों के सीमा से अधिक बढ़ने पर स्वतः ईमेल तैयार हो जाती है। ईमेल के अतिरिक्त मानकों के सीमा से अधिक बढ़ने पर दैनिक आधार पर औसतन १००० एसएमएस सृजित हो रहे हैं और ये एसएमएस हितधारकों (सीपीसीबी, एसपीसीबी और उद्योग) को भेजे जा रहे हैं।