आरबीआई गर्वनर का पद बना भाजपा के लिए अखाड़ा


नई दिल्ली। ऐसा संभवतः पहली बार हो रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर पद लगभग अखाड़ा बन चुका है। पहले रघुराम राजन के दूसरे कार्यकाल को लेकर जुबानी जंग। फिर संभावित उम्मीदवार को लेकर आरोप-प्रत्यारोप। अब भीतरखाने की खबर है कि यह विवाद भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी और वित्त मंत्री अरूण जेटली के पुराने अहं के कारण अखाड़े में तब्दील हो गई। हालांकि अब तक इस पूरे घटनाक्रम में प्रधानमंत्री या फिर उनके कार्यालय की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं है।
जानकारी के अनुसार भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी जिस तरह एक के बाद एक नौकरशाहों पर निशाना साध रहे हैं उसके बाद सवाल पूछा जा रहा है कि क्या यह सारी कवायद रि़जर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के अगले गवर्नर पद को लेकर है। बीजेपी के कुछ नेताओं का मानना है कि स्वामी का यह पूरा अभियान दरअसल एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश है। एक तरफ तो वे वित्त मंत्री अरुण जेटली से अपना पुराना हिसाब चुकाना चाहते हैं, दूसरी तरफ अपनी पसंद के व्यक्ति को आरबीआई का गवर्नर बनवाना चाहते हैं। यही वजह है कि रघुराम राजन के उत्तराधिकारी के लिए जो-जो नाम चर्चा में आए, उन पर स्वामी एक-एक कर निशाना साध रहे हैं। वित्त मंत्रालय में मुख्य र्आिथक सलाहकार अरिंवद सुब्रमण्यम के बाद स्वामी ने अब र्आिथक मामलों के सचिव शशिकांत दास को भी लपेटे में ले लिया है। कुछ बीजेपी नेताओं का कहना है कि स्वामी चाहते हैं कि आईआईएम बेंगलुरु के प्रोपेâसर आर वैद्यनाथन को सरकार आरबीआई का अगला गवर्नर बनाए। ऐसा करने के लिए यह जरूरी है कि जो-जो दावेदार हैं, उनके खिलाफ आरोप लगाए जाएं और उनके पुराने किस्से सामने लाए जाएं, ताकि उनकी दावेदारी कमजोर पड़ सके। हालांकि ऐसा वाकई हो पाएगा, यह यकीन कर पाना बहुत मुाqश्कल है।
बताया जाता है कि आईआईएम बेंगलुरु के प्रोपेâसर आर वैद्यनाथन सुब्रमण्यम स्वामी के बेहद करीबी हैं। उनकी आरएसएस के करीबी माने जाने वाले चेन्नई के चार्टर्ड एकाउंटेंट एस गुरुर्मूित से भी नजदीकी है। बीजेपी मार्गदर्शक मंडल के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने जब २००९ के लोक सभा चुनावों से पहले विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने का मुद्दा उठाया था, तब इसके पीछे प्रोपेâसर वैद्यनाथन ने बड़ी भूमिका निभाई थी। प्रोपेâसर वैद्यनाथन इस मुद्दे पर बीजेपी की ओर से बनाई गई टास्क फोर्स के भी सदस्य थे। इस चार सदस्यीय टास्क फोर्स में वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, एस गुरुर्मूित और वकील महेश जेठमलानी भी शामिल थे। इस टास्क ़फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भारतीयों का विदेशों में जमा काला धन २५ लाख करोड़ रुपये है। इस टास्क फोर्स की रिपोर्ट ने आडवाणी को परेशानी में भी डाल दिया था क्योंकि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से माफी मांगनी पड़ी थी। दरअसल इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी के भी विदेशी बैंकों में खाते हैं। इस पर सोनिया गांधी ने लाल कृष्ण आडवाणी को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। बाद में आडवाणी ने सोनिया को पत्र लिखकर इसके लिए माफी मांगी थी।