‘आप’ की गुटबाजी उजागर, विरोधियों को दरकिनार


नईदिल्ली।आम आदमी पार्टी की आंतरिक कलह की कलई बुरी तरह खुल गयी है। एक के बाद एक पार्टी के वरिष्ठ नेता शांति भूषण, प्रशांत यादव और योगेंद्र यादव को पार्टी के बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारियां हो रही हैं। पार्टी के अहम नेता की मानें तो इसकी जिम्मेदारी केजरीवाल के निगरानी में मनीष सिसोदिया को दी गयी है।
अब आम आदमी दो पक्ष में बंटी नजर आ रही है। एक पक्ष जोकि अरिंवद केजरीवाल के समर्थन में है दूसरा पक्ष जो कि शांति और योगेंद्र भूषण के पक्ष में है। केजरीवाल के पक्ष में मनीष सिसोदिया, संजय िंसह, कुमार विश्वास, दिलीप पांडे, आशुतोष, आशीष खेतान और नवीन जयिंहद हैं। वहीं केजरीवाल के खिलाफ प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, प्रोपेâसर आनंद कुमार, अजीत झा, इल्यास आजमी और मयंक गांधी हैं। पार्टी के कुछ नेता इन दोनों गुटों को राइट लिबरल और लेफ्ट लिबरल के नाम पुकारते हैं। मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में केजरीवाल के खिलाफ चल रहे आंदोलन की शुरुआत की गयी। सिसोदिया के ही इशारे पर ही भूषण और योगेंद्र यादव के खिलाफ अभियान चलाया गया। केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया को इसका उत्तरदायित्व सौंपा था। सिसोदिया ने खुद को पीछे रखते हुए आशुतोष, खेतान, संजय िंसह, दिलीप पांडे के जरिए अपना पक्ष पुरजोर तरीके से रखा। केजरीवाल के बाद पार्टी में मनीष सिसोदिया की पकड़ बेहद मजबूत है। पार्टी के इस सूत्र का कहना है कि उनके पक्ष में ५० विधायक हैं और वो चाहें तो केजरीवाल को मजबूर भी कर सकते हैं। यही नहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता की मानें तो सिसोदिया आने वाले समय में केजरीवाल के समकक्ष होंगे। साथ ही पार्टी के इस वरिष्ठ सूत्र की मानें तो लोगों की याद रखने की क्षमता बहुत ही कम है। अगले २ या ३ महीनों में लोग सबकुछ भूल जायेंगे और सभी मामले सुलझ जायेंगे। सिसोदिया के पास वित्त, शहरी विकास, मानव संसाधन मंत्रालय, सहित दो अन्य मंत्रालय हैं जोकि उनकी पार्टी में महत्ता को साफ जाहिर करता है। पार्टी के एक अहम सूत्र की मानें तो केजरीवाल को दिल्ली से आगे विस्तार के लिए एक अहम और उनके प्रति विश्वासपात्र व्यक्ति की जरूरत है। ऐसे में मनीष सिसोदिया से बेहतर कोई नहीं हो सकता है। वहीं पार्टी के इस नेता का यह भी कहना है कि दिल्ली के लोगों को बिजली पानी जैसी छोटी-छोटी समस्यों से निजात मिल जाये उनकी इससे ज्यादा की अपेक्षा नहीं हैं। दिल्ली के ज्यादातर मिडल क्लॉस वोटर ने इन्ही मुद्दों पर वोट दिया है। उन्हें मााqक्र्सस्ट, लेफ्ट या राइट जैसे बड़े मुद्दों से लेना देना नहीं है।