‘आधार’ कानून की अधिसूचना जारी, उल्लंघन पर हो सकेगी सजा


नई दिल्ली। वेंâद्र सरकार ने नए आधार कानून की अधिसूचना जारी कर दी है। पात्र लोगों को साqब्सडी और लाभों के स्थानांतरण के लिए इसके तहत जारी नंबर को अब वैधानिक दर्जा मिल गया है। कानून में नियमों का उल्लंघन करने पर एक से तीन साल तक की वैâद या दस हजार रुपये से एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। २६ मार्च को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि आधार (टारगेटेड डिलेवरी ऑफ फाइनेंसियल एंड अदर साqब्सडीज, बेनीफिट एंड र्सिवसेज) एक्ट, २०१६ के तहत विशेष पहचान संख्या के जरिये लोगों को साqब्सडी, लाभों और सेवाओं का कुशल एवं पारदर्शी वितरण सुनिाqश्चत हो सकेगा।
इसका इस्तेमाल भारत की समेकित निधि से संबंधित सभी लाभों के लिए किया जा सकेगा। आधार विधेयक को संसद ने १६ मार्च को मंजूरी दी थी। इसे धन विधेयक के रूप में पेश किया गया था। अब तक ९९.६४ करोड़ आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं। कानून के मुताबिक, जिन लोगों को अब तक आधार नंबर नहीं मिला है उन्हें साqब्सडी, लाभ या सेवा वितरण के लिए पहचान के वैकाqल्पक तरीके अपनाने का अवसर दिया जाएगा। आधार नंबर नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं होगा।
प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, अकुशल और असंगठित श्रमिकों, घुमंतू जनजातियों या ऐसे लोगों जिनका कोई स्थायी घर नहीं है और अधिनियम में उल्लेखित अन्य वर्ग के लोगों को आधार नंबर जारी करने के विशेष प्रयास करेगा। कानून के मुताबिक, साqब्सडी और लाभों के वितरण के लिए वेंâद्र और राज्य सरकारें दोनों आधार का उपयोग कर सकते हैं। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया में एक अध्यक्ष (अंशकालिक या पूर्णकालिक) और दो सदस्य (अंशकालिक) होंगे।