आतंकियों को मुहतोड़ जवाब के लिए वायुसेना का गरुड़ फोर्स


नईदिल्ली। पंजाब के पठानकोट एयरफोेर्स स्टेशन पर शनिवार को आतंकियों के नापाक मंसूबों का सुरक्षाबलों ने करारा जवाब दिया। आतंकियों को मुहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय वायुसेना की गरुड़ नाम से अपनी कमांडो फोर्स है । आतंक निर्मूलन के लिए एनएसजी और अमेरिका के नेवी सील कमांडो के तर्ज पर गठित गरुण ऑपरेशन को उसके अंजाम तक पहुचने में सक्षम है। वायुसेना की गरुड़ कमांडो फोर्स दुश्मन को नेस्तनाबूत करने की क्षमता रखती है। वायुसेना के विशेष टास्क पर कमांडो कार्रवाई के लिए कमांडो फोर्स गरुड़ तैयार की गई है। इस फोर्स का नाम पक्षीराज गरुड़ के आधार पर रखा गया है। इनमें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) व मारकोस (नेवी) के कमांडो की विशेषताएं हैं। वर्तमान में गरुड़ ग्वालियर के महाराजपुरा एयरफोर्स बेस सहित अन्य वायु सेना केन्द्रो पर तैनात है।
आमतौर पर चार गरुड़ कमांडो मिलकर एक छोटा दस्ता बनाते हैं जिसे ट्रैक कहते हैं। चार-चार कमांडो के ऐसे ही तीन ट्रैक बनाए जाते हैं। पहला ट्रैक दुश्मन पर हमला बोलता है, जबकि कमान नंबर टू के पास होती है। इतने में नंबर थ्री टेलिस्कॉपिक गन से निशाना लगाता है, जबकि आखिरी गरुड़ भारी हथियारों से तबाही मचाता है। ये आगे बढ़ने की तकनीक होती है। इसे वैâटर पिलर पैंतरा कहते हैं।
भारतीय वायुसेना की गरुड़ के इस्तेमाल के लिए आधुनिक हथियारों से लैस किया गया है जो खास तौर पर इजराइल से मंगाए जाते हैं। ये रात के अंधेरे में भी खतरनाक ऑपरेशन्स को अंजाम दे सकते हैं। ये फोर्स एक मशीन की तरह काम करती है। जिसके पुर्जे एक-दूसरे से मिले होते हैं।