असम : भाजपा की जीत में बिस्वा का विशेष योगदान


-कांग्रेस के लिए बने विलेन
नई दिल्ली । असम में भाजपा को अहम जीत दिलाने में केवल सीएम वैंâडिडेट सर्बानंद सोनोवाल और स्ट्रैटजिस्ट रजत सेठी की ही भूमिका नहीं रही, बाqल्क इसमें हेमंत बिस्वा सर्मा का भी विशेष योगदान रहा है। बता दें हेमंत बिस्वा सर्मा पहले कांग्रेस में थे, लेकिन इन चुनावों से पहले कई बार राहुल गांधी से मिलने से रोके जाने पर वे नाराज हो गए और वे भाजपा में शामिल हो गए। असम में परंपरागत वोटरों और चाय बागानों में काम करने वाले ३५ लाख मतदाताओं तक भाजपा की पहुंच बनाने में उनका विशेष योगदान माना जा रहा है। असम में २०११ में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने वाले हेमंत ने बताया कि सच ये है कि मैंने राहुल गांधी से करीब ८ से ९ बार बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मेरी बात सुनने से ज्यादा अपने डॉग्स के साथ खेलना बेहतर समझा। जब मैं अमित शाह से मिला तो राहुल ने एक सीरियस मैसेज भेज। मैंने उन्हें रिप्लाई किया कि अब आपका समय खत्म हुआ।
इसके साथ ही हेमंत ने बताया कि राहुल बहुत घमंडी हैं। जब आप उनसे मिलने जाते हैं तो वे उसे मालिक-नौकर का रिश्ता समझते हैं। उन्होने कहा एक बड़ी ऑपोजीशन पार्टी के रूप में कांग्रेस का कोई भविष्य नही है। या तो राहुल को बदलना होगा या फिर कांग्रेस बदल जाएगी। एक इंटरव्यू में हेमंत ने बताया कि मैं पिछले साल जुलाई में राहुल से मिला था और उनसे कहा था कि कांग्रेस २५ सीटों से आगे नहीं निकल पाएगी। अब नतीजा सबके सामने है। मैंने राहुल से कहा था कि आप बुरी तरह हारेंगे। बता दें हेमंत कभी पूर्व सीएम तरुण गोगोई के करीब माने जाते थे, लेकिन गोगोई के अपने बेटे गौरव को सक्सेसर के तौर पर प्रोजेक्ट करने के कारण कांग्रेस को तीन चुनावों में जीत दिलाने वाले हेमंत के पास उनसे किनारा करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। २०१५ में उन्होने भाजपा का दामन थामा। असम में हेमंत की खुद की पॉपुलेरिटी एक कांग्रेस नेता होने से कहीं ज्यादा होने की वजह से उन्हें इन चुनावों में सफलता मिली। असम में भाजपा को ८६, कांग्रेस को २६, एआईयूडीएफ को १३ और अन्य को १ सीट मिली है। माना जा रहा है कि सोनोवाल सीएम और सर्मा डिप्टी सीएम हो सकते हैं।