अमेरिका से न्यूक्लीयर डील की स्थिति स्पष्ट नहीं!


० डील की पिक्चर अब भी क्लीयर नहीं
नईदिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने तीन दिन के यादगार भारत दौरे के बाद मंगलवार को सऊदी अरब रवाना हो गए। दोनों देशों के बीच सिविल न्यूाqक्लयर डील को लागू करने की भले ही रुकावटें दूर कर ली गई हैं, लेकिन इसके तौर-तरीकों को लेकर अभी भी ाqस्थति स्पष्ट नहीं है। इस डील में जवाबदेही को लेकर भारत और अमेरिका ने मतभेद कम किए हैं, लेकिन इसका दोनों देशों में अलग-अलग मतलब निकाला जा रहा है।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि डील के साथ ही न्यूाqक्लयर कॉमर्स का रास्ता साफ हो गया है और अमेरिका भारत को सप्लाई किए जाने वाले न्यूाqक्लयर मटीरियल की ट्रैिंकग की शर्त से पीछे हट गया। हालांकि, अमेरिकी न्यूाqक्लयर सप्लायर्स का कहना था कि डील का स्वागत है, लेकिन अभी वे जवाबदेही लॉ में दी गई रियायतों को लेकर डॉक्युमेंट को रिव्यू कर रहे हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा कि यह वंâपनियों पर निर्भर करता है कि वे क्या करना चाहती हैं। पेरिस में एनर्जी ऐंड न्यूाqक्लयर पॉलिसी वंâसल्टेंट माइकल श्नाइडर ने न्यूज एजेंसी असोसिएटेड प्रेस से कहा कि किसी बड़ी सहमति के बारे में अभी तस्वीर साफ नहीं है। ६,६०० मेगावॉट के न्यूाqक्लयर प्लांट के लिए रिएक्टर सप्लाई करने वाली वंâपनी वेिंस्टगहाउस के एक सीनियर एग्जेक्युटिव का कहना था कि अगर सरकार इस पर भ्रम दूर नहीं करती है तो प्लांट लगाने में और देरी हो सकती है। एक्सपट्र्स ने कहा कि जवाबदेही लॉ को देखते हुए इंश्योरेंस पूल बनाने से कमर्शल न्यूाqक्लयर प्रॉजेक्ट्स की लागत और बढ़ सकती है।
फॉरन अपेâयर्स एक्सपर्ट और पूर्व डिप्लोमेट एम. के. भद्राकुमार का कहना है कि न्यूाqक्लयर डील की दोनों देशों में अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। ओबामा के इस दौरे का कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला है। उन्होंने दावा किया कि मोदी के फ्लैगशिप मेक इन इंडिया प्रोग्राम के लिहाज से भी यह दौरा कुछ खास नहीं रहा क्योंकि अमेरिका ने ४ अरब डॉलर के इन्वेस्टमेंट का वादा एक्सपोर्ट व्रेâडिट लाइन के तौर पर किया है। उन्होंने मंगलवार को सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम में ओबामा के संबोधन को अजीब करार दिया। उन्होंने कहा था कि भारत को र्धािमक स्वतंत्रता पर उपदेश देना ठीक नहीं है। ओबामा की ओर से तीन दिनों में यह तीसरी ऐसी नसीहत थी। उन्होंने ईरान और रूस को लेकर अमेरिका की पॉलिसी की बात की और इससे मोदी संवाददाता सम्मेलन में मुाqश्कल में पड़ थे। हालांकि, एक अन्य पूर्व डिप्लोमेट जी. पार्थसारथी का कहना है कि ओबामा का यह दौरा सफल रहा क्योंकि इससे सार्वâ में जबर्दस्ती घुसने की कोशिश करने वाले चीन को एक स्पष्ट संकेत मिला है।