अमेरिका और चीन तक जा रहा भारत का ग्रेनाइट पत्थर


बेंगलूरु। विश्व में भारत के सजावटी पत्थर की बड़ी मांग बढ़ती जा रही है। अमेरिका और चीन सहित कई देशों में कर्नाटक के सजावटी ग्रेनाइट पत्थर की काफी मांग है। वर्तमान में चीन इसका सबसे बड़ा बाजार है। कुछ वर्षों से ग्रेनाइट किंटग और पॉलििंशग में अत्याधुनिक तकनीक अपनाने के बाद बड़े मायने में इस उद्योग में काफी विस्तार हुआ है। खान मंत्री विनय कुलकर्णी ने पैâडरेशन ऑफ इंडिया ग्रेनाइट एंड स्टोन इंडस्ट्री (एफआईजीएसआई) की ओर से बेंगलूरु इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेंटर (बीआईईसी) में आयोजित १२वें चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ग्रेनाइट्स एंड स्टोन पेâयर ‘स्टोना-२०१६़ळ के उद्घाटन समारोह में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि विश्व बाजार में कर्नाटक के ब्लैक, िंपक व अन्य प्रकार के ग्रेनाइट की काफी मांग है। बागलकोट, कोप्पल, बेंगलूरु आदि जिलों में ग्रेनाइट के भंडारोंं को देखते प्रदेश में ग्रेनाइट किंटग और पॉलििंशग यूनिट स्थापित हुई है। ग्रेनाइट की बढ़ती मांग के मद्देनजर सरकार किंटग व पॉलििंशग इकाइयों की संख्या को अधिक से अधिक बढ़ाने पर विचार कर रही है। ग्रेनाइट इंडस्ट्री में अग्रणी कर्नाटक प्रदेश में हाल ही खान विभाग द्वारा ८५० लीज स्वीकृत की गई है।
वहीं वेंâद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि इस उद्योग के सामने बड़ी चुनौतियां है। सरकार उद्यमियों की परेशानियों का समाधान करे क्योंकि वे इसमें बड़ा पैसा लगाते हैं। इसके समाधान के लिए प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री के साथ बैठकर चर्चा होनी चाहिए। देश से बाहर जा रहे धन को रोकने का प्रयास होना चाहिए। डॉ. कठेरिया ने पत्थर उद्यमियों को आश्वस्त किया कि वे पत्थर उद्योग व उद्यमियों की समस्याएं प्रधानमंत्री व वाणिज्य मंत्री के सामने रखने के साथ ही जल्दी ही बैठक करवाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि आज इस उद्योग में १५ लाख लोग रोजगार पा रहे हैं। स्टोन इंडस्ट्री के विकास से ३० लाख लोग रोजगार पा सकते हैं।
वेंâद्रीय खान सचिव बलिंवदर कुमार ने उद्यमियों की समस्याओं के निराकरण के लिए वेंâद्र स्तर पर प्रयास करने का आश्वासन दिया। उन्होंने उद्यमियों से खनन व पत्थर किंटग से निकलने वाले अपशिष्ट के निस्तारण के लिए सही उपाय करने पर जोर भी दिया। इससे पूर्वएफआईजीएसआई के अध्यक्ष आर. सेकर ने पत्थर उद्यमियों की समस्याएं रखते हुए वेंâद्र व राज्य सरकारों से उनके समाधान में सहयोग का आग्रह किया। स्टोना २०१६ के चेयरमैन इशिंवदर िंसह ने कहा कि यहां दुनिया भर से आए पत्थर उद्यमी आपस में मिलने के साथ ही सौदे भी कर सवेंâगे। भारत ने स्टोन इंडस्ट्री से दुनिया में काफी पकड़ बनाई है। एफआईजीएसआई के संस्थापक अध्यक्ष आर. वीरमणी ने कहा कि कभी ५० करोड़ का पत्थर कारोबार अब १५ हजार करोड़ तक जा पहुंचा है। अब वैज्ञानिक तकनीक से खनन होने लगा है। आज छोटी-छोटी मशीनरी स्टोन इंडस्ट्री को आगे बढ़ा रही है। ग्रेनाइट, मार्बल और सैंड स्टोन ने दुनिया भर में पहचान बनाई है। स्टोन इंडस्ट्री की समस्याओं का निदान होना चाहिए। सरकार को इसमें मदद करनी चाहिए।