अब भयावह रूप में सामने आ रही पानी की समस्या


मुंबई,। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके आसपास के शहरोें में पीने के पानी का संकट है। पानी की समस्या अब भयावह रूप में सामने आ रही है। पीने योग्य पानी की कमी से हालात ये है कि मुंबई से सटे भायंदर में ताले में पानी कैद रहता है, ताकि कोई चुरा ना ले पानी। उधर ठाणे जिले में डैम में पानी कम हुआ तो घरों में पानी कटौति शुरू हो गई। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि मुंबई और आस-पास के शहरो मे रहने वालो की प्यास कैसे बुझेगी?
– पानी के लिए बुरा हाल
हाल ये है कि समंदर किनारे बसे मुंबई और उसके आसपास भायंदर और ठाणे जैसे शहरी इलाकों में भी पानी की कटौती हो रही है। भायदंर में तो पानी की चोरी के डर से लोग टंकियों में ताला लगाकर रखते हैं। जी हां, भायंदर के मुर्धा गांव के ज्यादातर घरों में पानी की टंकियां इसी तरह घरों के बाहर रखी रहती हैं। इसकी वजह है कि घर के नलों में पानी ३ से ४ दिन में एक बार आता है। ऐसे में रोज की जरूरतों और पीने के पानी के लिए गांव के लोग टैंकरों पर निर्भर रहते हैं। अप्रैल का महीना शुरू होते ही इन टैंकरों की संख्या भी घटने में लगती है, इसीलिए इस गांव के लोगों के लिए पानी इतना कीमती हो चुका है कि पानी की टंकियों पर जंजीर और ताले लगाने की नौबत आ गई है। भायंदर में पानी की सप्लार्र्ई की जिम्मेदारी मीरा भायंदर महानगरपालिका और एमआईडीसी यानी महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की है। यहां की १२ लाख आबादी को रोज साढ़े सत्रह करोड़ लीटर पानी की जरूरत है लेकिन सिर्फ सोलह करोड़ लीटर पानी ही मिलता है।
– पानी की किल्लत से लोग घर छोड़ने पर मजबूर
मुंबई से सटे ठाणे जिले में भी हालात ठीक नहीं है। लोग पानी के संकट की वजह से घर छोड़कर जाने की बात तक कर रहे हैं। झीलों में पानी कम हुआ तो घरों में भी पानी आना कम हो गया है। पैसे वाले तो निजी टैंकरों से पानी लेकर काम चला लेते हैं लेकिन झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले गरीबों को सिर्फ सरकारी पानी का ही आसरा है। ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी-निजामपुर तथा उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन ने फैसला किया है कि वो हफ्त मेें ३ दिन के बाद एक बार शहर को पानी देगा। पानी की किल्लत के बीच सोसाइटी में रहने वाले तो प्राइवेट टैंकर से पानी खरीद भी ले रहे हैं लेकिन झुग्गी झोपड़ियों मेेंं रहने वालो का क्या वो तो सरकारी पानी पर ही निर्भर हैं।