अब घने कोहरे की जानकारी पहले ही मिल जाएगी


बेंगलुरु । अब घने कोहरे की जानकारी पहले ही मिल जाएगी। जिससे ठंड के मौसम में अक्सर छाने वाले कोहरे के प्रकोप से होने वाली मार्ग दुर्घटना से बचा जा सकेगा। मार्ग में चलने वाले लोगों को कोहरे की सघनता की जानकारी पहले से दी जा सकेगी। इससे वे सुरक्षात्मक उपाय कर सवेंâगे या फिर अपनी यात्रा को टाल सवेंâगे। इसके लिए उपयोगी सेटेलाइट पर आधारित फॉग मॉनीटिंरग सिस्टम आइआइटी, बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने तैयार कर लिया है। इस मॉनीटिंरग सिस्टम से सड़क, रेल व हवाई यातायात को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी। आइआइटी के असिस्टेंट प्रोपेâसर रीतेश गौतम के अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप में गंगा किनारे के मैदानी भाग में ठंडक के मौसम में घना कोहरा बड़ी समस्या रहता है। इसका असर पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में भी रहता है। नया सिस्टम पूरे इलाके में छाने वाले कोहरे की पूर्व सूचना देने में सक्षम होगा। यह सूचना सरकारी एजेंसियों और सामान्य जनों को दी जा सकेगी। अमेरिका के नासा में ाqस्थत मौसम और विकिरण प्रयोगशाला में वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर चुके गौतम ने बताया है कि नया सिस्टम उन्होंने अपने विद्र्यािथयों- रीमा चौरी, दिनेश पाटिल, सरवर रिजवी और मनोज िंसह के साथ मिलकर तैयार किया है।
गौतम के अनुसार सॉफ्टवेयर के जरिये नासा के सेटेलाइट से डाटा प्राप्त करके जाना जा सकेगा कि गंगा किनारे के मैदानी इलाकों में कहां पर कोहरे और कम ऊंचाई वाले बादल छाए हुए हैं। ज्यादा स्पष्टता से प्राप्त फोटो के जरिये उनकी सघनता का आकलन किया जा सकेगा। यह सिस्टम फिलहाल भारत के इनसैट सेटेलाइट की मदद से काम कर रहा है। गौतम के अनुसार यह सिस्टम थोड़े विकास के बाद धूल भरी आंधी, खेती से उपजे खरपतवार जलाए जाने के मामलों, चक्रवात और मानसून के बादलों का भी समय पूर्व आकलन कर सकेगा। इससे प्रदूषण संबंधी कारकों के बारे में भी जानने में मदद मिलेगी।