अजित पवार समेत 70 नेताओं पर को-ऑॅपरेटिव बैंक चुनाव लड़ने पर बैन


मुंबई। महाराष्ट्र की देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने राठ्रवादी कांठोस पार्टी (एनसीपी) नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत अलग-अलग पार्टियों के कुल ७० नेताओं के अगले १० साल तक को-ऑॅपरेटिव बैंक के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप में राज्य सहकारिता बैंक के पूरे निदेशक मंडल को बर्खास्त भी कर दिया है। दरअसल मामला ११०० करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का है। भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने पर अजीत पवार समेत अलग-अलग पार्टियों के कुल ७० नेताओं के चुनाव लड़ने पर १० साल का प्रतिबंध लगाया गया है। यह फैसला महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
– सभी दलों के नेताओं पर गाज
राज्य सहकारी बैंक के अलावा नागपुर, वर्धा और बुलढ़ाणा जिला बैंकों को डुबाने वाले निदेशकों पर भी कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई को झेलने वाले कुल ७७ निदेशकों में सभी दलों के नेता शामिल हैं। लेकिन ज्यादातर नेता एनसीपी के हैं। तो उसके बाद नंबर आता है कांग्रेस के नेताओं का। दस साल चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध की कार्रवाई झेल रहे प्रमुख नेता हैं- एनसीपी के अजित पवार, हसन मुश्रीफ, दिलीप सोपल, विजय सिंह मोहिते पाटिल, राहुल मोटे, जयप्रकाश दांडेगावकर और बालासाहेब सरनाईक शामिल हैं। कांग्रेस के मधुकर चव्हाण, विजय वडेट्टीवार, माणिकराव कोकाटे, आनंदराव अडसूल के साथ ही बीजेपी के पांडूरंग फुंडकर और पीजन्टस एण्ड वर्कर्स पार्टी के जयंत पाटिल तथा मीनाक्षी पाटिल।
– एनसीपी और कांग्रेस को लगा झटका
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक राज्य की सभी जिला सहकारी बैंकों की अपेक्स बॉडी है। अजीत पवार सहित अन्य कई राजनेता इस बैंक के निदेशक मंडल में थे। एनसीपी के साथ कांग्रेस का राज्य के सहकारिता बैंकिंग क्षेत्र में दबदबा माना जाता है। निदेशक मंडल में ज्यादातर इन्हीं दलों के नेता थे। उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों के चलते बैंक को नुकसान हुआ। लिहाजा बैंक का निदेशक मंडल बर्खास्त कर दिया गया है।
– कांग्रेस-एनसीपी की वित्तीय जड़ पर चोट
महाराष्ट्र में सहकारिता एनसीपी और कांग्रेस की राजनीति में वित्तीय ताकत की जड़ है, और इस बार चोट सीधे जड़ पर हुई है। बीजेपी सरकार की कार्रवाई से एनसीपी झल्ला उठी है। पार्टी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा है कि बीजेपी साहूकारों के जरिए सहकारिता पर कब्जा चाहती है। वे किसी व्यक्ति को चुनाव से दूर कर सकते हैं, लेकिन दल को नहीं। जो अपात्र हुए हैं उनके बदले में दूसरे लोग चुनाव लड़ेंगे।
– कानून में होगा संशोधन
महाराष्ट्र सरकार ने इस कार्रवाई के लिए कानूनन संशोधन का रास्ता चुना है। ताकि उसे कोर्ट में चुनौती न मिल सके। सरकार अपनी कार्रवाई को और मजबूत बनाने के लिए विधान भवन की मंजूरी भी दिलाएगी।
– रिजर्व बैंक के आदेश के बाद कार्रवाई
महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि कांग्रेस-एनसीपी ने इस बैंक में भ्रष्टाचार किया है। वे इसे नकार नहीं सकते। जब यही बात रिजर्व बैंक कह रही है, तब तो उसे मानना ही होगा। जो भी कार्रवाई हुई, वह रिजर्र्व बैंक के आदेश के बाद ही हो रही है।
– चव्हाण ने भी बर्खास्त किया था निदेशक मंडल
उल्लेखनीय है कि एनसीपी बनाम कांग्रेस की लड़ाई में तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी राज्य सहकारी बैंक का निदेशक मंडल बर्खास्त किया था, लेकिन इस बार की कार्रवाई और ज्यादा सख्त है।