अखिलेश के पास नहीं रही साइकिल तो कांग्रेस को होगी मुश्किल


नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। लेकिन सूबे की सबसे बड़ी पार्टी सपा में अपनों में ही जंग जारी है। पार्टी पर वर्चस्व स्थापित करने की लड़ाई का असर ये हुआ है कि पार्टी और पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल पर दावे के लिए अखिलेश और मुलायम गुट दोनों चुनाव आयोग की शरण में हैं। इन सबके बीच समाजवादी संघर्ष से कांग्रेस की रणनीति पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। जानकारों का मानना है कि कांग्रेस पशोपेश में है कि क्या बिना साइकिल चुनाव चिन्ह के साथ अखिलेश यादव के साथ जाना ठीक होगा।

सपा में झगड़ा, कांग्रेस की नजर

राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के रणनीतिकार चाहते हैं कि चुनाव चिन्ह साइकिल अखिलेश गुट के पास ही रहे। ऐसा होने पर समाजवादी पार्टी से जुड़े समर्थकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इसके अलावा अगर चुनाव आयोग पार्टी सिंबल को मुलायम गुट को देना चाहता है तो उस हालात में चुनाव चिन्ह साइकिल का जब्त होना ज्यादा बेहतर होगा।

अखिलेश के समर्थन में डेढ़ लाख दस्तावेज

समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर मुलायम और अखिलेश गुट दोनों आमने-सामने हैं। अखिलेश गुट की तरफ से पहले ही डेढ़ लाख से ज्यादा दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपे जा चुके हैं। विधायकों, सांसदों और कार्यकर्ताओं ने हलफनामे पर हस्ताक्षर कर सीएम अखिलेश यादव में अपना विश्वास जताया है।

रामगोपाल बनाम अमर सिंह

अखिलेश यादव के खांटी समर्थक बनकर उभरे रामगोपाल यादव ने कहा कि अब इसमें संदेह की गुंजाइश नहीं है कि असली समाजवादी पार्टी कौन है। लेकिन रामगोपाल के कट्टर विरोधी माने जाने वाले अमर सिंह ने कहा कि अखिलेश की तरफ से पेश किए गए हलफनामे जाली हैं, उन हलफनामों की सत्यता पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। अमर सिंह के इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए रामगोपाल यादव ने कहा कि जो व्यक्ति खुद जाली है, उसे सबकुछ अपना जैसा ही दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अगर अमर सिंह के आरोप में तनिक भी सच्चाई होगी तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

…जब मुलायम ने भरी हुंकार

रविवार को मुलायम सिंह ने बेटे अखिलेश यादव से किसी तरह की समझौते की अटकलों को खारिज करते हुए फिर हुंकार भरी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अब भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव द्वारा एक जनवरी को बुलाए गए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन को ‘अवैध’ करार देते हुए मुलायम ने कहा कि उन्हें (रामगोपाल) तो 30 दिसंबर को ही पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था।

इसलिए रामगोपाल को पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने का अधिकार नहीं था। मुलायम ने यहां पत्रकारों से कहा- ‘मैं समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं और अखिलेश यादव (सिर्फ) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। शिवपाल यादव अब भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं।’ प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अमर सिंह भी मुलायम सिंह यादव के साथ मौजूद थे।

बेबस भी दिखे मुलायम

इस बीच, सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में अपने घर पर बैठक के दौरान मुलायम ने कार्यकर्ताओं के सामने पहले बेबसी जताते हुए कहा- ‘मेरे पास बस गिनती के विधायक हैं। अब सब कुछ अखिलेश के पास है। अखिलेश मेरा लड़का है, हम क्या कर सकते हैं, मार थोड़े देंगे। अखिलेश जो कर रहा है उसे करने दो।’