अंग्रेजी शासनकाल में राजद्रोह आरोप में आरएसएस संस्थापक भी गए थे जेल


नईदिल्ली । ब्रिटेन शासन के खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने के उद्देश्य से सन १८७० में भारतीय दंड संहिता में धारा १२४-ए (राजद्रोह) जोड़ा। वर्ष १९२५ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के ंस्थापना करने वाले केशवराम बलिराम हेडगेवार पर भी राजद्रोह का मुकदमा चलाकर जेल भेज दिया गया था। तब एक विदेशी राज के खिलाफ संघ प्रमुख ने आवाज उठाई थी। अंग्रेजों को अपने राज की रक्षा करनी थी, इसलिए उनका राजद्रोह लगाना गलत है। आज ाqस्थति अलग है। ये लोग भारत के ही खिलाफ नारे लगा रहे हैं। देश में राजद्रोह का कानून हर हाल में होना चाहिए। हेडगेवार को उनके भाषणों के लिए २३ फरवरी, १९२१ को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। १९ अगस्त, १९२१ को तत्कालीन अंग्रेजी राज की अदालत ने उन्हें राजद्रोह का दोषी पाते हुए सजा दी थी। मुकदमे में अपने बचाव में दिए गए उनकी दलील को ब्रितानी अदालत ने बाहर दिए गए भाषणों से ज्यादा राजद्रोही माना था। उन्हें एक साल सश्रम कारावास की सजा हुई थी। खास बात है कि राजद्रोह का मौजूदा कानून अंग्रेजी शासन द्वारा सन १८७० में बनाया गया था और आज भी यह जस का तस जारी है। हेडगेवार ने जनवरी १९२१ में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए असहयोग आंदलोन में हिस्सा लिया। इस आंदोलन के दौरान दिए गए उनके भाषणों को ब्रितानी सरकार ने राजद्रोह माना था। कांग्रेस से अलग होकर हेडगेवार ने १९२५ में िंहदूवादी संगठन बनाया, जिसे बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के नाम से जाना गया।
हेडगेवार की जीवनी लेखक राकेश सिन्हा ने कहा कि तब और अब की परिाqस्थतियां अलग हैं। अंग्रेजी कानून के तहत अंगेजों ने बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, राम प्रसाद बिाqस्मल, भगत िंसह और राममनोहर लोहिया जैसे हजारों स्वतंत्रा सेनानियों पर कार्रवाई की थी। आजाद भारत में डॉक्टर विनायक सेन, लेखिका अरुंधति रॉय, विश्व िंहदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया शिरोमणी अकाली दल के नेता सिमरनजीत िंसह मान पर भी राजद्रोह का आरोप लग चुका है।