गुजरात के एक मात्र बाघ का हुआ शिकार या मृत्यु


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27 साल बाद गुजरात में वन विभाग द्वारा बाघ की उपस्थिति दर्ज की गई, उसकी कुछ हि दिनों में मृत्यु हो गई और उसका अंतिम संस्कार किया गया था। लुनावाड़ा के पास कंतार वन में से मृत देह ‌मिलने पर कई प्रश्न उत्पन्न हो गए थे। वन विभाग के नए विशेषज्ञों की एक समिति की मौजूदगी में एक डॉक्टर के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम किया गया। जिसमें बाघ के शरीर पर कोई चोट या हिंसक निशान नहीं थे।

डॉक्टरों द्वारा तीस अलग-अलग नमूने लिए गए। सूत्रों द्वारा पता चला कि मृत बाघ के 18 नाखून, जबड़े के दो दांत, त्वचा और सभी अंग सुरक्षित हैं। उनके अनुसार, बाघ के कुछ अंगों का क्षय हो गया था। शिकार किये जाने की बात को कोई समर्थन नहीं मिला है। रिपोर्ट मिलने के बाद अंतिम रिपोर्ट की घोषणा की जाएगी। नेशनल टाइगर कन्ज़र्वेशन ऑथोरिटी(NTCA) की गाइड लाइन के अनुसार नए विशेषज्ञों की समिति का गठन किया गया था। जिसमें वडोदरा के मुख्य वन संरक्षक, एनटीसीए के प्रतिनिधि, गिर फाउंडेशन के पशुचिकित्सक, एक गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि, जिला पशुपालन निदेशक और उप वन संरक्षक महिसागर के साथ तीन पशु चिकित्सक शामिल थे।

संत मातरो के जंगलों में 11 फरवरी 2019 को नाइट विजन कैमरा में बाघ देखा गया था। बाघ, देखे जाने वाले स्थान से 15 किलोमीटर की दूरी पर चलकर कतार के जंगल में आ गया था। 4 दिन पहले बाघ की मौत हो गई थी। बाघ 6-7 साल का था। इसकी ऊंचाई 262 सेंटीमीटर और 71.400 किलोग्राम वजन था।