सोमनाथ में कैसे उपयोग किया तकनीक का


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आज के युग को डिजिटल युग कहा जाता है। पहले अगर लोगों को पैसे का भुगतान करना होता था या अपने मोबाइल बिल का भुगतान करना होता था तो उन्हें लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। लेकिन अब हजारों काम करने वाला एक मोबाइल ही अपनी जेब में रखना काफि है। जब बच्चों को पढ़ाई करनी होती है और वे किसी भी स्थान पर अपने साथ किताबें नहीं ले जा सकते हैं तो मोबाइल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चे अब अपनी बड़ी किताबों की पीडीएफ फाइलों को मोबाइल फोन में लेते हैं। इसके माध्यम से वे अध्ययन कर सकते हैं। मोबाइल आने के बाद लोगों के कई काम अब चुटकियों में हो जाते हैं। मोबाइल में एक बटन दबाने के साथ आप क़ुछ क्षण भर में लाखों का लेनदेन कर सकते हैं।

जहां टैक्नोलोजी के कई नुकसान है जैसे एडिक्शन आंखों पर ज़ोर पड़ना, इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेवस वहीं इस तकनीक के कई महत्वपूर्ण फयदे भी हैं जैसे घर बैठे घंटो बचा कर काफी सारा काम हो जाता है। ई-लर्निंग, ई-बैंकिंग जैसे एप्लिकेशन का उपयोग करके पैसे का लेनदेन बांय हाथ का खेल हो गया है। आप विश्व के किसी भी कोने में बैठ कर विश्व के किसी भी हीस्से में किसी से भी बात कर सकते हैं। लोगों के लिए एक दुसरे से जुड़ना आसान हो गया है।

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इस डिजिटल दौर के चलते अब गुजरात में एक धार्मिक स्थान पर भगवान की पूजा करना भी विदेशों में रहने वाले लोगों के लिए सम्भव होगा। यह विचार सोमनाथ के कुछ ब्राह्मणों द्वारा लाया गया है। इसके कारण सोमनाथ में मोबाइल में वीडियो कॉल के माध्यम से दूर बैठे लोग पूजा का लाभ उठा सकते हैं।

ब्राह्मणों ने मीडिया के साथ बातचीत की और कहा कि जो लोग बाहरी व्यक्ति या किसी अन्य राज्य में हैं। वे यहां नहीं आ सकते हैं या उनके पास कम समय उपलब्ध है। वे अपने मोबाइल के माध्यम से वीडियो कॉल करके यह पूजा कराते हैं और ब्राह्मण यहां उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। और उनको वीडियो कॉल के माध्यम से जलाभिषेक और भगवान की पूजा का लाभ प्रदान करते हैं। तो उस व्यक्ति को लगता है कि वह यहां ही पूजा कर रहा है।

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ब्राह्मणों ने यह भी कहा कि मोबाइल पर आने के बाद उन्हें अपने धार्मिक ग्रंथों को अपने पास नहीं रखना पड़ता। वे अपने धार्मिक ग्रंथों को पीडीएफ के माध्यम से कहीं भी पढ़ सकते हैं। ब्राह्मणों ने आगे कहा कि तकनीक के इस युग में न केवल संस्कृत भाषा बल्कि तकनीक का ज्ञान होना भी आवश्यक है।