नर्मदा का पानी शेत्रुंजी बांध भरने में नहीं, किसानों को सिंचाई के लिये दीजिये!


(Photo Credit : : gujarat.gov.in)

शेत्रुंजी बांध में पानी का स्तर १५ फुट यानि क्षमता का २० प्रतिशत है। कम बारिश होने के कारण यहां पानी कम होने से नर्मदा का पानी इसमें डाला जा रहा है। उधर तलाजा के विधायक कनुभाई बारिया ने शेत्रुंजी सिंचाई योजना का पानी देने की पेशकश मुख्यमंत्री के समक्ष की है। भाजपा ने भी किसानों को सिंचाई के लिये पानी देने की मांग की थी। परंतु भाजपा सरकार ने यह पानी पीने के लिये आरक्षित रखने की घोषणा की थी। यदि पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन की चेतावनी भी कनु बारिया ने दी थी।

शेत्रुंजी नदी गुजरात के अमरेली जिले की सबसे बड़ी २२७ किमी लंबी नदी है। वह गीर जंगल में स्थित चांचांई टेकरी से निकल कर धारी गांव के पास पालीताना की टेकरियों के उत्तर में शेत्रुंजय पर्वत के पास से गुजर कर तलाजा की टेकरियों के पास गोपनाथ से १० किमी दूर खंभात की खाड़ी में अरब सागर में मिलती है। उसके जल का व्याप ५६३६ वर्ग किमी का है। इस नदी का पानी रोकने के लिये शेत्रुंजी बांध बनाया गया है।

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने १९५५ में इस बांध की नींव रखी थी। खो‌डियार बांध १९६७ में बनाया गया था। ३२ मी‌लियन घन मीटर संग्रहशक्ति है इसकी। लेकिन २०१९ में इसमें ५ मीलियन घन मीटर से अधिक पानी नहीं है। इस पानी से २४ गांवों की १६,६७५ एकड़ जमीन की सिंचाई संभव है। यह अमरेली शहर में पेयजल का मुख्य स्त्रोत है। इस स्थान पर गणधरा खोडियार माताजी का सुप्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इस मंदिर के सामने नदी के काले पत्थरों में पानी का झरना भी है।

शेत्रुंजी नदी का उद्गम ५५ किमी के अंतर पर खोडियार बांध और १६० किमी के अंतर पर शेत्रुंजी बांध है, इसी कारण यहां के किसान सिंचाई के लिये पानी की मांग कर रहे हैं। वे कहते हें कि नर्मदा बांध सिंचाई के लिये बनाया गया है ऐसे में उसका पानी बांध को भरने नहीं अपितु सिंचाई के लिय उपयोग में लाया जाना चाहिये।