भ्रष्टाचार : उत्तर गुजरात युनिवर्सिटी के कुलपति पर गिरी गाज; अब किसकी बारी?


(PC: ngu.ac.in)

गुजरात के पाटण की हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात युनिवर्सिटी के कुलपति बी. ए. प्रजापति को भ्रष्टाचार के आरोप में राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने पद से हटा दिया है। उनके खिलाफ लोकायुक्त की जांच बैठाई गई थी, जिसमें वे दोषी करार दिये गये।

सरकार ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि कुलपति बी. ए. प्रजापति के खिलाफ की गई लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रो. प्रजापति ने उनके पद का दुरूपयोग किया था और गंभीर दुराचरण और भ्रष्टाचार को अंजाम ‌दिया था। इसी‌ रिपोर्ट के आधार पर उन्हें पद से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।

गौरतलब है कि प्रो. बी. ए. प्रजापति वर्ष २०१६ में कुलपति बने थे। उससे पूर्व वे सूरत की वीर नर्मद दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी के कुलपति भी रह चुके हैं। उस वक्त भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। संघ परिवार की संस्था एबीवीपी ने उनके खिलाफ मोरचा खोला था। बावजूद उसके उन्होंने तीन वर्ष की अपनी टर्म पूरी की थी। विवादों के बावजूद उन्हें ऊत्तर गुजरात युनिवर्सिटी में कुलपति के रूप में आरुढ कर दिया गया था।

यद्पि अब सरकार ने हिंमतपूर्वक निर्णय लेकर उन्हें दूर किया है। लोकसभा के चुनाव से पूर्व इस प्रकार का निर्णय लेना के मुख्यमंत्री के माद्दे को देखते हुए शिक्षा जगत में उनकी प्रशंसा हो रही है। हालांकि, राज्य की अन्य कई युनिवर्सि‌टियों में की गई नियुक्तियां भी विवादों में है। प्रश्न यह है कि क्या मुख्यमंत्री ऐसे विवादित चेहरों के खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे?

उल्लेखनीय है कि राज्य की ५ से अधिक युनिवर्सिटियों में नियुक्तियों का विवाद पिछले २ वर्षों से जारी है। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी के कुलपति शिवेन्द्र गुप्ता के खिलाफ भी हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है।