वडोदरा में 120 फुट गहरे कुएं में गिरा बंदर, 4 दिन बाद रेस्क्यु किया गया


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यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना या किसी कारण से घायल हो जाता है, तो वह सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज करवाता है। लेकिन इंसानों की तरह, घायल पशुओं और पक्षियों का इलाज कई जीव दया संस्थाओं के कार्यकर्ताओं की मदद से किया जाता है। वड़ोदरा के एक गाँव में ऐसा ही एक किस्सा सामने आया, जहाँ एक बंदर एक कुएँ में गिर गया था और पिछले चार दिनों से पीड़ित था। जब इस घटना की जानकारी गांव के लोगों ने जानवरों और पक्षियों के लिए काम कर रहे एक संगठन के कार्यकर्ता को की, तो वे मौके पर पहुंचे और बंदर को कुएं से बाहर निकाला और उपचार के बाद प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया।

एक रिपोर्ट के अनुसार, तीन-चार बंदर वड़ोदरा के पास सोखडा गांव में घुसे थे। उस दौरान एक बंदर 120 फीट गहरे कुएं में गिर गया। जब लोगों को इस बारे में पता चला तो गांव के लोग कुएं पर आए। लेकिन कुआ गहरा होने के कारण, गाँव के लोग कुँए में उतरने के लिए तैयार नहीं थे। चार दिनों तक बंदर कुएं में दर्द से कर्राह रहा था।

गाँव वालों ने बंदर को बाहर निकालने के कई प्रयास किए, लेकिन वे असफल रहे। इसके बाद ग्रामीणों ने जानवरों और पक्षियों के लिए काम करने वाले वन्यजीव बचाव ट्रस्ट को कॉल करके पूरे मामले की जानकारी दी। इसके कारण, संगठन के चिराग राठौड़, मेहुल पटेल, न‌िलेश पांडोर और मिलाप सोनी तकनीकी उपकरणों के साथ कुएं पर पहुंचे। करीब चार घंटे के बचाव के बाद बंदर को कुएं से बाहर निकाला गया। उसके बाद बंदर का इलाज करके उसे प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।