गुजरात में जल संकट के निवारण को लेकर गंभीर सरकार


राज्य के सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के इलाकों में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बारिश कम होने के कारण बांधों में पानी की आय कम रही।

राज्य के बांधों की स्थिति और जलसंचय के आंकड़े जारी किये

अहमदाबाद। गुजरात राज्य के सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के इलाकों में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बारिश कम होने के कारण सौराष्ट्र के पोरबंदर, देवभूमि द्वारका, मोरबी, भावनगर, जामनगर, राजकोट और कच्छ जिले के बांधों में पानी की आय कम रही, जिसके कारण बांधों में काफी अल्पमात्रा में जल उपलब्ध है। इन जिलों में पातालकुवे भी कम रिचार्ज हुए हैं।

इस कारण राज्य सरकार ने पीने के पानी के लिये नर्मदा नहर की मालिया और वल्लभीपुर ब्रांच केनाल चालू रखने का निर्णय किया है। इसके अनुसार वर्तमान में दोनों ब्रांच केनाल चालू हैं, जिससे पर्याप्त मात्रा में नर्मदा का पानी पीने के लिये उपलब्ध है।

उधर पोरबंदर जिले के फोदारा बांध में पानी न के बराबर है। इस बांध से पोरबंदर शहर और गुट योजना के लिये २ करोड़ लीटर जल उपलब्ध कराया जाता है। इस कमी हो पूरा करने के लिये राज्य सरकार ने १२० करोड़ रूपये की लागत पर ६४ किमी लंबी उपलेटा से राणावाव पाईपलाईन के काम को मंजूरी प्रदान की। यह कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया गया और राणावाव तक जलापूर्ति की गई। आगामी दो दिनों में आनुशंगिक कार्य पूरा करके पोरबंदर को पानी उपलब्ध कराया जायेगा।

भूतकाल के वर्षों में देवभूमि द्वारका, जामनगर और पोरबंदर के क्षेत्रों को कालावाड के पास स्थित देवडा हेडवर्क्स से ७ करोड़ ली पानी उपलब्ध कराया जाता था, अब इस मात्रा को बढ़ाकर १३ करोड़ ली किया गया है।

वहीं कच्छ में विगत वर्ष २७ करोड़ लीटर पानी नर्मदा व टप्पर बांध से उपलब्ध कराया जाता था जो अब बढ़ाकर ३२ करोड़ लीटर किया गया है। चालू वर्ष में अंजार से भूज का कुकमा तक कच्छ जिले की पाईपलाईन के काम को युद्ध स्तर पर पूरा किया गया है। जिससे भूज, बन्नी, लखपत, अबसाडा इलाकों में ३ करोउ़ लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस साल नर्मदा नहर से जुड़ी सौनी योजना के मारफत मच्छु-२, मच्छु-१, आजी-१, न्यारी-१, आजी-३, रणजीत सागर, सुखभदर, गोमा, फलकु बांध में पानी भरा गया है। कच्छ ब्रांच केनाल के मारफत टप्पर, सुवई और फतेगढ़ बांध में पानी भरा गया है, जो वर्षा ऋतु तक चलेगा।

राज्य की ५१ तकसीलों में पानी की किल्लत घोषित की गई है परंतु लोकसभा चुनाव आचारसंहिता लागू होने के कारण कुछ गांवों में बोरवेल आदि काम शुरू नहीं किये जा सके हैं। राज्य सरकार ने चुनाव आयोग से ऐसे कार्यों को शुरू करने देने की अनुमति मांगी है।