गुजरात में शराब घुसाने वाले मामले में राजस्थान DGP ने CID को जांच का आदेश दिया


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लोकसभा चुनाव के दौरान, गांधीनगर के एक पुलिस इन्सपेक्टर शराब के ट्रक को गुजरात में प्रवेश करा रहे थे, तब राजस्थान पुलिस ने शराब के ट्रक और गांधीनगर पुलिस को पकड़ लिया। हालाँकि, उसके बाद गांधीनगर पुलिस और राजस्थान पुलिस चेकपोस्ट अधिकारियों द्वारा मामले को बीस लाख में सुलझा लिया गया, लेकिन अब यह बात राजस्थान के पुलिस महानिदेशक की नज़र में आने से, उन्होंने राजस्थान CID अपराध शाखा को इस मामले की जाँच करने का आदेश दिया है।

गुजरात में शराबबंदी के कारण शराब का कारोबार लगातार घूम रहा है। 1960 से, गुजरात में, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब के बूटलैगर्स बहुत अधिक शराब का कारोबार कर रहे हैं। यह कारोबार पुलिस की मदद के बिना संभव नहीं है, यह एक स्पष्ट सच्चाई है। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान कड़क नाकाबंदी के दौरान, राजस्थान पुलिस ने शराब के एक ट्रक को गुजरात में प्रवेश करने से रोक दिया था, लेकिन आश्चर्य यह था कि शराब के ट्रक के साथ, गांधीनगर के पुलिस अधिकारी और जवान भी शामिल थे, इस प्रकार स्वयं पुलिस शराब घुसाए ऐसी पहली घटना सामने आई थी।

इस मामले में, राजस्थान पुलिस ने शिकायत करने की कार्यवाही शुरु करने पर गांधीनगर पुलिस द्वारा मामला अपने वरिष्ठ अधिकारियों बताया जाने पर वे भी काफी नाराज़ हुए। आखिरकार गांधीनगर पुलिस 20 लाख रुपये देकर मामला रफा दफा करके वहां से बाहर हो गई। हालांकि, घटना से नाराज गांधीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कजम उठाएंगे इस डर से पुलिस इंस्पेक्टर ने छुट्टी की मांग की पर छुट्टी को मंजूरी नहीं दी, जिससे पुलिस इंस्पेक्टर बीमारी के नाम पर छुट्टी पर चले गए। इस पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा अपने फोन संपर्कों को काट दिया है और पुलिस अधिकारियों के वाट्सएप ग्रुप को भी उन्होने छोड़ दिया है।

इस मामले में गुजरात पुलिस ने चुप्पी साध ली है। लेकिन घटना राजस्थान मीडिया में प्रकाशित होने के बाद, राजस्थान के DGP ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इस मामले को राजस्थान CID अपराध शाखा के अधिकारियों को सौंपने का आदेश दिया है। इस प्रकार, भले ही गुजरात पुलिस अपने अधिकारी को छोड़ दे पर राजस्थान पुलिस की की कार्यवाही गुजरात पुलिस की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।