गुजरात के इन 3 उद्योगपतियों ने पाकिस्तान करोडों के बिजनेस को ठोकर मार दी


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अहमदाबाद। 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश के 40 जवान शहीद हो गये थे। इस घटना को लेकर देश भर में रोष व्याप्त रहा। कुछेक लोगों ने पाकिस्तान के पूतलों का दहन किया, तो कुछेक ने सड़कों पर पाकिस्तान की ध्वज बनाकर उसपर वाहन दौड़ाकर अपना विरोध जताया। वहीं, गुजरात के जुनागढ़ क्रिकेट ऐसोसियेशन ने १० देशों की क्रिकेट टीम के नाम वाले ग्राफिक बोर्ड में से पाकिस्तान का नाहिटा दिया। वहीं गुजरात के वापी के तीन उद्योगकारों ने अपना माल पाकिस्तान निर्यात नहीं करने का निर्णय किया।

उल्लेखनीय है कि वापी जीआईडीसी ऐशिया की सबसे बड़ी जीआईडीसी में से एक है। यहां के उद्यमी बांग्लादेश, तुर्की, ईरान, ऑस्ट्रेलिया, चीन, कोरिया, जापान, लंदन, पाकिस्तान और अमरिका जैसे देशों में अपना माल-सामान निर्यात करते हैं। इन्हीं में शामिल वापी जीआईडीसी के तीन कैमिकल उद्यमियों ने १४ फरवरी की घटना को लेकर पाकिस्तान के प्रति अपना गुस्सा प्रकट करते हुए आगे से वहां अपने माल का निर्यात नहीं करने का फैसला लिया। ये तीनों उद्यमी हर वर्ष एक करोड़ से अधिक का माल पाकिस्तानी व्यापारियों को भेजते रहे हैं।

भारत के दो स्थानों से पाकिस्तान में माल की ढुलाई होती है। एक है मुंबई जेटी बंदरगाह से समुद्र मार्ग से माल कराची पहुंचता है। दूसरा अमृतसर से समझौता एक्सप्रेस के जरिये माल लाहौर पहुंचता है। पुलवामा की घटना के बाद भारत के अधिकतर उद्योगपतियों ने अपने माल का पाकिस्तान को निर्यात रोक दिया है। अब माना जा रहा है कि पाकिस्तान को जरूरी माल चीन से आयात करना पड़ेगा।

इस संबंध में वापी के उद्योगपति नीतिन शाह ने बताया कि उनके ३० वर्ष से पाकिस्तान के उद्योगपतियों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। इसी कारण वर्षों से वे डाईज का कारोबार वहां के व्यापारियों के साथ करते आ रहे हैं। परंतु दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति कायम होने के बाद व्यापार स्थगित कर दिया गया है।

अन्य उद्योगपति स्नेह देसाई कहते हैं कि वे २० वर्षों से पाकिस्तान टर्कीज ब्लू डाई भेजते रहे हैं। हालिया घटना के बाद उन्होंने ऑर्डर रद्द कर आगे से पाकिस्तान में निर्यात कारोबार नहीं करने का निर्णय किया है।

तीसरे उद्योगपति केयुर शाह ने बताया कि वे अभी नहीं, भविष्य में भी कभी पाकिस्तान के साथ कारोबार नहीं करेंगे। व्यापार से पहले देशप्रेम होता है। देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के शहीद होने से उन्हें भी गहरा आघात लगा है।