बहुचर्चित इशरत एन्काउंटर केस में वणजारा और अमीन बरी


गुजरात के बहुचर्चित इशरत जहां एन्काउंटर केस में सीबीआई कोर्ट ने डीजी बंजारा और एनके अमीन डिस्चार्ज अर्जी पर आज महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
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अहमदाबाद । गुजरात के बहुचर्चित इशरत जहां एन्काउंटर केस में सीबीआई कोर्ट ने डीजी वणजारा और एनके अमीन डिस्चार्ज अर्जी पर आज महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने याचिका को मंजूर कर लिया और कहा कि वणजारा और अमीन के खिलाफ 197 के तहत कार्यवाही नहीं की जा सकती।

सीबीआई ने सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी डीजी वणजारा और एनके अमीन के खिलाफ मुकद्दमा चलाने की गुजरात सरकार से मंजूरी मांगी थी। लेकिन गुजरात सरकार ने मार्च 2019 में ही उन दोनों के खिलाफ मुकद्दमा चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। सरकार से मंजूरी नहीं मिलने पर सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार को डीजी वणजारा और एनके अमीन को आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने 15 हजार के बांड पर कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली है। कौसर ने वणजारा को बरी किए जाने की याचिका को चुनौती दी थी। गुजरात के पूर्व डीआईजी वणजारा ने राज्य के पूर्व प्रभारी डीजीपी पीपी पांडेय को बरी किये जाने के तर्ज पर खुद को बरी करने की मांग की थी। वणजारा ने अपनी याचिका में दावा किया था कि केंद्रीय एजेंसी की तरफ से दायर आरोपपत्र मनगढ़ंत है और उनके खिलाफ कोई भी अभियोग लायक सामग्री नहीं है।

जरात एटीएस के पूर्व प्रमुख ने कहा कि गवाहों के बयान काफी संदिग्ध हैं। पुलिस अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त अमीन ने इस आधार पर बरी किये जाने की मांग की कि मुठभेड़ वास्तविक था और केंद्रीय जांच ब्यूरो की तरफ से पेश गवाहों की गवाही विश्वास योग्य नहीं है। जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए दोनों को इशरत केस से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने इशरत जहां एन्काउंटर जायज ठहराते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जाता तो पता नहीं गुजरात में क्या हो जाता। इसलिए अपने देश के लिए 7-8 साल बिताने वाले अधिकारियों को देश की ओर से देश के एक नागरिक के नाते सलाम करता हूं। कोर्ट के फैसले के बाद बंजारा और अमीन ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि आखिरकार सत्य की जीत हुई है। गौरतलब है 15 जून 2004 को गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद के कोतरपुर क्षेत्र में 19 वर्षीय इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लई, अमजद अली अकबर अली राणा, जिशान जौहर को मार गिराया था।

– ईएमएस