गुजरात सरकार ने किया खुलासा : बाबू बोखरिया को निलंबित क्यों नहीं किया


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गुजरात सरकार के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री प्रदीप सिंह जाड़ेजा ने कांग्रेस विधायक भगा बारड को विधानसभा की सदस्यता से निलंबित किये जाने के सरकार के फैसले पर कांग्रेस द्वारा किये जा रहे विरोध को अनुचित करार देते हुए कहा है कि कांग्रेस झूठ फैला रही है।

प्रदीप सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि विपक्ष कांग्रेस अपने विधायक के बचाव में उतर आई है और भाजपा के विधायक तथा पूर्व मंत्री बाबू बोखरिया के मामले में सरकार द्वारा अलग रुख अख्त्यार करने का आरोप लगा रही है, परंतु उन्होंने अदालत के फैसले का अभ्यास नहीं किया है।

प्रदीप सिंह जाड़ेजा ने जानकारी देते हुए बताया कि विधायक भगा बारड को सूत्रापाडा की अदालत के ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट ने गैरकानूनी रूप से खनीज चोरी के लगभग २५ वर्ष पुराने मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने आईपीसी ३७९ की धारा के अंतर्गत उन्हें दो वर्ष, ९ महीने की सख्त कैद और २५०० रुपये दंड की सजा सुनाई है। प्रदीप सिंह ने आगे कहा कि यदि भगा बारड सचमुच निर्दोष हैं तो २५-२५ वर्षों से चल रहे इस मामले में क्यों अपने आप को निर्दोष साबित नहीं कर पाये हैं?

उन्होंने भाजपा विधायक बाबू बोखरिया के खिलाफ चल रहे मामले में सजा सुनाये जाने के बाद भी विधानसभा की सदस्यता से निलंबित नहीं किये जाने के विपक्ष के आरोप का जवाब देते हुए कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने १० जुलाई २०१३ के दिन लीली थोमस के खिलाफ मामले में फैसला सुनाया था कि यदि चुने हुए प्रतिनिधि को कोर्ट दोषी करार देते हुए दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाती है तो फैसले की तारीख से अपने आप प्रतिनि‌धि की सदस्यता रद्द हो जाती है। प्रदीप सिंह जाड़ेजा ने इस संदर्भ कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला १० जुलाई, २०१३ के बाद के सभी मामलों पर लागू होता है।

प्रदीप सिंह जाड़ेजा आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट के उक्त फैसले की जानकारी विधानसभा अध्यक्ष को दिये जाने पर उसकी जांच करके अध्यक्ष ने कांग्रेस विधायक भगा बारड को विधानसभा की सदस्यता से निलंबित करने का निर्णय किया। भाजपा के विधायक बाबू बोखरिया के मामले में पोरबंदर की अदालत ने १५ जून, २०१३ को सजा का एलान किया था, जो तारीख सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख से पहले की थी।

उन्होंने आगे कहा कि बाबू बोखरिया के मामले में फैसले के दिन ही जेएफएमसी कोर्ट ने जमानत मंजूर कर दी थी और उसके बाद ऊपरी अदालत ने सजा के फैसले पर स्थगन आदेश दे दिया था और अपील में उन्हें निर्दोष घोषित ‌किया जा चुका है। वैधानिक मामलों के मंत्री ने आगे कहा कि भारत के चुनाव आयोग ने भी सर्वोच्च न्यायालय के १० जुलाई, २०१३ के लीली थोमस मामले के फैसले के संदर्भ में १३ अक्टूबर, २०१५ को परिपत्र जारी करके जन प्रतिनिधि को अयोग्य घोषित करने के संदर्भ में दिशा-निर्देश जारी किये हैं।

ऐसे में बाबू बोखरिया के मामले में विधानसभा की सदस्यता से निलंबित करने का प्रावधान लागू नहीं पड़ता, जबकि भगा बारड के मामले में वह लागू पड़ता है। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले और चुनाव आयोग के परिपत्र का पालन मात्र किया है।