गुजरात : बनासकांठा के इस गांव के लोग अभी से पानी के लिये तरस रहे


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वर्षा ऋतु में कम बारिश के कारण किसानों को सिंचाई के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी न मिलने से रबी की फसल नहीं ली जा सकी है। वहीं अब गुजरात के बनासकांठा क्षेत्र से गुजरने वाली नर्मदा नहर में सरकार द्वारा पानी न छोड़ने का निर्णय लिया है। इसके पीछे का कारण यह बताया गया है कि नर्मदा नदी में गरमी के दिनों में पीने के लिये आवश्यक जल ही उपलब्ध है।

यदि यह पानी सरकार द्वारा सिंचाई के लिये छोड़ा जायेगा तो लोगों को पीने के पानी की किल्लत हो जायेगी। परंतु बनासकांठा के छोटा उदेपुर के क्वांट में कुछेक गांव ऐसे भी हैं जहां लोगों को गरमी के प्रारंभ में ही पीने के पानी की किल्लत महसूस हो रही है। इस किल्लत के कारण पीने का पानी लेने के लिये गांववासियों ने सरकार के समक्ष काफी गुहार लगाई पर सरकारी अधिकारियों के कानों में जू तक नहीं रेंगी है। ऐसे में अब गांववासियों ने इकठ्ठा होकर जमीन में नाले खोदने का निर्णय लिया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार छोटा उदेपुर के कोचवड गांव में हाफेश्वर जलापूर्ति योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा पानी की ठंकी और हैंडपंप लगाये गये हैं। परंतु गांव के ५० हैंड पंपों में से केवल दो ही कार्यरत हैं। पिछले वर्ष पानी की किल्लत के कारण हैंडपंप भी सूख गये थे। इस कारण गांव के लोगों को कूए खोदने पड़े थे। गांव के सभी लोगों ने इकठ्ठा होकर कूए खोदे और उसमें से पानी प्राप्त किया। कूए का पानी भी एक ही वर्ष चला। अब जब कि बारिश कम हुई है, इस कारण कूए का पानी सूख गया है। ऐसे में गांववासी फिर से पानी के लिये तरस रहे हैं।

कोचवाड गांव के लोगों ने एक बार फिर नाले खोदकर पानी निकालने का निर्णय किया है। इसके भाग स्वरुप लोगों सुबह से शाम को नाले खोदते रहते हैं। सरकार द्वारा हाफेश्वर जलापूर्ति योजना के अंतर्गत गांव में दो पानी की टंकियां बनाई हैं परंतु कुछेक अधिकारियों की लापरवाही के कारण ठंकी में समय पर पानी नहीं भरता और महीनों से वे खाली पड़ी हैं।