क्या करें जब लॉकडाउन के कारण बच्‍चों का घरों में नहीं लग रहा मन


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नई दिल्ली (ईएमएस)। लॉक डाउन होने के बाद बच्चों को घर से बाहर खेलने की आजादी नहीं रह गई है। ऐसे में न तो दिन भर इनके हाथ में टीवी को रिमोट दिया जा सकता है और न मोबाइल। दिन पर पढ़ाई करने से भी बच्चे परेशान हो जा रहे हैं। ऐसे में विशेषकर, छोटे बच्चों को संभालना मुश्किल काम होता जा रहा है। विशेषकर, नजफगढ़ में बच्चों को बहलाने के लिए और घरों में बांधे रखने के लिए चित्रकारी का सहारा ले रही हैं। दै नजफगढ़ की महिलाओं ने अपनी बातें भी साझा की। गैर सरकारी संस्था उड़ान की संस्थापक रितू गुप्ता ने कहा कि नजफगढ़ में विभिन्न व्यवसाय व पेशे से जुड़ी हुई सभी महिलाओं के बच्चे आपस में खेलते कुदते थे। चूंकि, अब संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इसलिए सभी अपने अपने बच्चों को घर में अपने अपने तरीके से संभालने का प्रयास कर रहे हैं। वह बताती है कि चूंकि, वह एक शिक्षिका भी हैं और बच्चों के मनोविज्ञान को समझती है इसलिए उनके सामने सादा पेज और कलर पेंसिल रख देती है। इसके बाद वे आपस में ही व्यस्त हो जाते हैं।

बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर जेबी सिंह का कहना है कि उनकी दो बेटियां हैं। क्लिनिक बंद करने के बाद इन्हें भी घर पर संभालना पड़ रहा है। इनके खाने, सोने और खेलने को समय सारिणी तय कर दी है। कोरोना के चलते 18 मार्च तक गृह परीक्षाएं होने के बाद राजधानी के सभी स्कूलों को बंद कर दिया है। शिक्षकों को मूल्यांकन व टैब से नंबर चढ़ाने का काम घर से ही करने को कहा गया था। शिक्षा निदेशालय ने 24 मार्च को छठीं कक्षा, 27 मार्च को कक्षा 7वीं, 8वीं, 27 मार्च को कक्षा 9वीं और 30 मार्च को कक्षा 11वीं के मूल्यांकन के बाद अंक टैब के माध्यम से अपलोड करना था।