महिला या पुरुष के दिमाग में कोई मूल फर्क नहीं


अपनी रिसर्च में न्यूरोसाइंस के डॉक्टर डीन बर्नेट ने साफ कर दिया कि महिला या पुरुष के दिमाग में कोई मूल फर्क नहीं है।
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न्यूरोसाइंस के डॉक्टर ने अपनी रिसर्च से साफ किया

नई दिल्ली। अपनी रिसर्च में न्यूरोसाइंस के डॉक्टर डीन बर्नेट ने साफ कर दिया कि महिला या पुरुष के दिमाग में कोई मूल फर्क नहीं है। अध्ययन के दौरान उन्होंने पाया कि दोनों के दिमाग के काम करने में जेंडर से कोई फर्क नहीं पड़ता। महिला-पुरुष के दिमाग में फर्क नहीं होने को डॉ लाइज इलियट ने भी माना है। उन्होंने कहा कि दोनों के दिमाग का ढांचा एक सा होता है।

इलिएट पिंक ब्रेन, ब्लू ब्रेन नाम से किताबें लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों के बायोलॉजिकल फर्क से लोगों को ऐसा लगता है कि उनके ज़ेहन भी अलग होते हैं। जबकि सच ये है कि महिला-पुरुष के बर्ताव में जो फर्क है वो उन्हें समाज, परिवार से मिली परवरिश की वजह से है। लाइज इलिएट ने माना कि पुरुषों के दिमाग का साइज महिला के दिमाग से 10 फीसदी बड़ा होता है, लेकिन बड़े होने का फर्क इस थ्योरी पर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि आनुपातिक रूप से भी पुरुष के अंग महिलाओं से बड़े ही होते हैं। लेकिन इस बात का दिमाग के काम करने पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

कैलिफोर्निया के आमेन क्‍लिनिक्‍स के शोधकर्ताओं ने एक शोध में सिर्फ ये पाया था कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मस्तिष्क अधिक सक्रिय होता है। उनका शोध लैंगिक आधार पर मस्तिष्क के अंतर को समझने के लिए था। उसमें कहा गया था कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मस्‍तिष्‍क के विभिन्‍न हिस्‍सों में रक्‍त प्रवाह काफी उच्‍च होता है। जिससे उनकी फोकस करने की क्षमता अधिक होती है लेकिन इस कारण उनमें घबराहट भी अधिक देखी जाती है। इंसान का मस्तिष्क दो हिस्सों में बंटा होता है। मस्तिष्क का दायां भाग शरीर के बाएं भाग को नियंत्रित करता है। और बायां, दाएं को। दिमाग, शरीर के तापमान, ब्लडप्रेशर, दिल की धड़कन और सांस को भी नियंत्रित करता है। वैज्ञानिक ने महिला-पुरुष के मस्तिष्क में फर्क खोजने के लिए तफसील से दोनों के दिमाग का काम जाना। इस शोध में कहा गया था कि इसी वजह से अधिकतर महिलाओं में अल्‍जाइमर, डिप्रेशन और घबराहट की बीमारियां पायी जाती है। जबकि पुरुषों में ध्‍यान की कमी के विकार पाए गए।

– ईएमएस