नरेन्द्र मोदी के पुनः प्रधानमंत्री बनने संबंधी बनारस के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. प्रसाद दिक्षित की भविष्यवाणी सच हुयी


वीरेंद्र प्रताप दूबे

सूरत। पांच ग्रहों के प्रबल योग से भारी बहुमत के साथ श्री नरेंद्र भाई मोदी जी को 2019 में भारतवर्ष के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने की सटीक भविष्यवाणी करने वाले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व ट्रस्टी एवं सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रसाद दीक्षित ने एक बार पुन: कहा है कि 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री पद की दूसरी बार शपथ लेने वाले श्री मोदी जी का नाम स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा।

भारतवर्ष सहित संपूर्ण विश्व में इनकी भूरी भूरी प्रशंसा का होना सुनिश्चित है। शपथ ग्रहण चक्र की सूक्ष्म गणना से स्पष्ट होता है कि ग्रहों एवं नक्षत्र का उत्तम योग के प्रभाव से नवागत प्रधानमंत्री मोदी जी की अगुवाई में भारत विश्व गुरु भी अवश्य बनेगा। एक ओर जहां देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी वहीं दूसरी ओर देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का चाक-चौबंद होना भी सुनिश्चित है।

17 सितंबर 1950 को जन्म लेने वाले श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी की वृश्चिक राशि है। इनकी जन्म कुंडली की सूक्ष्म गणना से स्पष्ट है कि राजनीति के प्रमुख कारक ग्रह राहु एवं मंगल के साथ शनि, शुक्र एवं गुरु योगकारक ग्रह हैं। इन ग्रहों के उत्तम प्रभाव से मोदी जी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। यह देश के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे। अपनी साफ-सुथरी छवि वाले प्रधानमंत्री के ग्रह योग सर्वोत्तम हैं। इन ग्रहों के कारण ही इनमें निष्ठा कूट-कूट कर भरी हुई है।

कुंडली से स्पष्ट होता है कि 2004 से 2010 तक सूर्य की महादशा काल इनके लिए उत्तम रहा। इसमें यह गुजरात के मुख्यमंत्री भी रहें l 2010 से 2020 तक चंद्रमा की महादशा काल है। चंद्रमा की महादशा काल में ही यह भारत वर्ष के दो बार प्रधानमंत्री बनने में सफल भी हुए। इनकी कुंडली में ‘शशि मंगल योग’ भी है। इसके उत्तम प्रभाव से इनके जीवन में चार चांद लगा। चंद्रमा लग्न में बैठा है तथा भाग्य स्थान का स्वामी भी है। शास्त्र सम्मत है कि जिसकी कुंडली में भाग्य स्थान का स्वामी चंद्रमा लग्न में बैठा हो, वह जातक चंद्रमा की महादशा काल में उच्च पद पर आसीन होता है। विदित हो कि यही स्थिति मोदी जी की कुंडली में भी है।

ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार जीव का सभी कुछ इन ग्रहों नक्षत्रों से प्रभावित एवं संपादित होता है। हमारे शरीर मूल पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश इन्हीं के अनुग्रह हैं। पृथ्वी तत्व की प्रकृतिया त्वचा, केश, मांस, नाड़ी और अस्थि हैं। जल तत्व की प्रकृतिया ज्योति, श्वेद, रक्त, लार और मूत्र हैं। अग्नि तत्व की प्रकृतिया दौड़ना, लेटना, कांपना, चलना एवं संकोच करना है। यह सब इन्हीं ग्रहों के आग्रह हैं। माता-पिता, पत्नी संबंधित जन आदि समस्त संबंध इन्हीं से प्रेरित हैं। हमारी समग्र चेतना, उत्पत्ति, स्थिति, लय, सत् असत् सबके यह नियामक हैं। इसके वर्जन से स्पष्ट है कि जन्म होने से लेकर मृत्यु होने तक कि जो भी घटनाएं घटित होती हैं, उसके पीछे साक्षात ग्रह ही विद्यमान हैं। ग्रहों के प्रभाव से ही मनुष्य का संपूर्ण जीवन संचालित होता है।

भारतवर्ष में अनेक प्रभावशाली नेताओं का जन्म हुआ है। सभी की जन्म कुंडली में कुछ खास योग जरूर होता है। इसी क्रम में मोदी जी की कुंडली के अवलोकन के पश्चात स्पष्ट हो जाता है कि मंगल स्वगृह होने, राजनीति का प्रमुख कारक ग्रह राहु का पंचम भाव में होने, गुरु का सुखभाव में होने तथा शुक्र एवं शनि का एक साथ कर्मस्थान अथवा दशम भाव में बैठना सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा। भारतीय ज्योतिषशास्त्र में ऐसा योग बहुत कम ही देखने को मिलता है। वास्तव में जिस जातक की जन्म कुंडली में ऐसी स्थिति हो तथा उत्तम महादशाकाल प्रारंभ हो तो ऐसा जातक देश की सर्वोच्च पद पर आसीन होते हुए अपना नाम रोशन करता है। यही स्थिति मोदी जी की कुंडली मी भी परिलक्षित है।

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के विषय में अपनी सटीक भविष्यवाणी करने के लिए विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित प्रसाद दीक्षित ने 1997 ई. में मायावती जी के सरकार बनने एवं गिरने, सीताराम केसरी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने, केंद्र में देवगौड़ा सरकार के पतन, इंद्र कुमार गुजराल के अस्थिर होने, 2000 ई. में राजनाथ सिंह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पूर्ण कार्यकाल संपन्न होने, 2007 ई. में श्रीमती प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति एवं श्री हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाने, 2012 में श्री अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने, 2014 में श्री नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री बनने, 2017 ई. में श्री रामनाथ कोविंद जी को भारतवर्ष का राष्ट्रपति एवं श्री वेंकैया नायडू जी को उपराष्ट्रपति बनने तथा 2019 ई. में श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी को भारतवर्ष का दूसरी बात प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी, जो सत्य साबित भी हो चुकी है।