जो जनता के सामने बनेगा शेर, जनता कर देगी ढेर!


Photo/Loktej

आपको याद हो तो एक व्यक्ति ने चुनाव परिणामो के बाद खून बहने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि नतीजों में गड़बड़ी हुई तो सड़कों पर खून बहेगा क्योंकि जनता गलत नतीजों को बर्दाश्त नहीं करेगी। गलत नतीजों से उनका मतलब खुद के विपरीत परिणाम से था, क्योकि खुद के अनुकूल परिणाम किसे गलत लगा है? जैसे कि राहुल गांधी दो जगहों से लड़े थे, जिसमे एक जगह हार गए ओर एक जगह जीत गए, तो वो गलत किसको बताएंगे? यह आप सोचते रहना मैं मुद्दे पर आता हूँ। यह नेता थे उपेंद्र कुशवाहा जिन्होंने कहा था कि वोट की रक्षा के लिए हथियार उठाने की जरूरत पड़ी तो उठाएं। आज जो रिजल्ट की लूट हो रही है इसके लिए हथियार भी उठाना पड़े तो उठाना चाहिए।

खून बहाने के लिए उतावले हो रहे नेताजी के अरमानों का ही खून हो गया। उनकी पार्टी लोकसभा में शून्य पर सिमट गई। ओर तो ओर खुद उपेन्द्र कुशवाहा अपनी दोनों सीटों (उजियारपुर व काराकाट) से चुनाव हार गए। अब खून तो खून है, अरमानों का हो या किसी ओर का बहना चाहेगा तब बहेगा ही, इसलिए उस ताजातरीन जख्म पर उनके विधायक भी जख्म दे गए। बिहार विधानसभा में उनकी पार्टी के दोनो विधायक जनता दल यूनाइटेड में विलीन हो गए। मतलब पार्टी अब लोकसभा तथा विधानसभा दोनो जगह शिफर हो गई।

अब कुशवाहा जी किसका खून बहाएंगे? इस दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा जैसी स्थिति नेताजी की हो गई। इसके बाद वो विरोधियों के निशाने पर भी आ गए। क्योकि लोग ओर सब भले ही भूल जाये, ऐसी धमकी ओर चेतावनी नही भूलते है। बारबार कुरेदते रहते है।

कुशवाहा के पूर्व सहयोगी रहे जेडीयू नेता नागमणि ने कहा कि उन्‍होंने इस बकरी को बाघ की खाल पहनायी थी। हमने समझा था कि उपेंद्र कुशवाहा समाज के लिए कुछ करेंगे, लेकिन उन्होंने धोखा दिया। इस कारण चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा को कुशवाहा समाज ने उन्‍हें फिर से बकरी बना दिया।
यह लोकतंत्र है कुशवाहा जी, यहां जो जनता के सामने शेर बनने की कोशिश करता है, जनता उसे तुरन्त मेमना बना देती है और बाद में क्या होता है यह तो आपको पता ही है। कल ही प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि सेवाभाव से ही जनता का दिल जीता जा सकता है, शासक भाव से नही। सेवा भाव से जनता के समक्ष विनीत रहने वाले को जनता तुरन्त शेर बना देती है लेकिन वही शेर अगर उसी जनता के सामने दहाड़ने लगे तो जनता पुनः मूषकों भवः कहते भी देर नही लगाती है। और बिहार में मुशे का क्या हश्र होता है यह तो आप जानते ही है कुशवाहा जी? इसलिए आप सहित तमाम नेता जो खुद को सर्वोपरि समझते है मान ले कि माँ भारती को इष्ट देव समझ उनकी सन्तान सभी भारतीयों के समक्ष सेवाभाव से पेश आये ताकि अस्तित्व बचा रहे। नही तो लालूजी से मिल आइये जेल में जिन्होंने हार के सदमे में खाना भी छोड़ दिया है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय