आखिर कब होगा हल मंदिर मुद्दे का


हमारे देश मे कश्मीर तथा राममंदिर दोनो शास्वत मुद्दे है। 1989 से मैं इन्हें सत्ता प्राप्ति की सीढ़ी के रूप में देख रहा हूँ। भाजपानीत दलों को सत्ता मिली है तो भी इन दोनों मुद्दों की वजह से ओर गई भी है तो इन्ही दोनो मुद्दों पर नाराजगी से। 2004 में मुझे याद है अटलजी ने इन मुद्दों को छोड़ इंडिया साइनिंग करने चले थे तो दस सालों के लिए भाजपा सत्ता से दूर हो गई थी। इस बार फिर जनता को उम्मीद बंधी है कि राममंदिर ओर कश्मीर समस्या का हल जल्दी निकलेगा। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी संकेत दिया था कि राम का काम जल्द होगा। अब भाजपा की सदा से सहयोगी रही पार्टी शिवसेना ने भी राममंदिर के लिए बोला है।

शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने ट्वीट किया है कि बीजेपी के पास 303 सांसद, शिवसेना के 18 सांसद,राम मंदिर निर्माण के लिए और क्या चाहिए?

इसके अलावा कल गुरुवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी फिर से केंद्र सरकार से राम मंदिर निर्माण शुरू करने की अपील की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि यह सही समय है जब नमो सरकार को रामजन्मभूमि न्यास समिति या विश्व हिंदू परिषद के जरिये राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत कर देनी चाहिए। 67.703 एकड़ की पूरी ज़मीन केंद्र सरकार की है। जब सुप्रीम कोर्ट फैसले देगा तो जीतने वालों को मुआवज़ा दिया जा सकता है, पर ज़मीन नहीं। इस बीच निर्माण शुरू किया जा सकता है।

वैसे देखा जाए तो लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा से गठबंधन का ऐलान होने से पहले शिवसेना भाजपा पर हमलावर थी और उस वक़्त पार्टी के नेता अपने भाषणों में लगातार राम मंदिर का मुद्दा उठा रहे थे। पार्टी की ओर से ‘हर हिंदू की यही पुकार, पहले मंदिर फिर सरकार’ जैसे नारे दिए गए थे। खुद उद्धव ठाकरे ने कहा था कि मंदिर बनाएंगे लेकिन तारीख नहीं बताएंगे। राम मंदिर एक जुमला था और अगर यह बात सही है तो एनडीए सरकार के डीएनए में दोष है। 25 नवंबर 2018 को उद्धव ठाकरे अयोध्या भी गए थे।

अब शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कल कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का वादा अगर अब पूरा नहीं होता तो जनता हमें जूतों से पीटेगी। राउत ने कहा कि 2014 में हमने राम मंदिर निर्माण का वादा किया था, लेकिन हम इसे पूरा नहीं कर पाए। इस बार का लोकसभा चुनाव भी हमने राम मंदिर के नाम पर लड़ा।

यह बात तो सही है कि राममंदिर के नाम पर चुनाव लड़े जाते रहे है परन्तु यह भी उतना ही सही है कि बाद में सरकार कोर्ट के फैसले का इंतजार करती है। मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब को, यहां के भाईचारे को नुकसान पहुंचे बगैर इस मुद्दे का स्थायी हल अब निकल जाना चाहिए, ताकि इसके नाम पर हुए फसादों से फिर से कभी भारत माता का दामन अपने ही पुत्रो के रक्त से रक्तरंजित न हो।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय