सारागढ़ी युद्ध : जानिये जब 21 सिखों ने 12000 अफगानों को धूल चटाई तो ब्रिटन की संसद ने क्या किया


(PC : Twitter)

यूनेस्को की सूची में दर्ज “सारागढ़ी युद्ध”

लेखक – शरद नारायण खरे

हाल ही में अक्षय कुमार अभिनीत बेहतरीन व सुपरहिट रही फिल्म “केसरी” शानदार फ़िल्म मानी गई है। पर बड़े खेद की बात है कि हमारे इतिहासकारों ने इस ओर अधिक ध्यान नहीं दिया, जिससे हम इतिहास के इस गौरवशाली युध्द की वीरगाथा से लगभग वंचित ही रहे, पर इस फिल्म ने हमें गर्व करने का अवसर प्रदान किया है।

अक्षय कुमार की केसरी फ़िल्म इतिहास के सबसे अद्भुत युद्ध पर आधारित है जिसमें एक तरफ 21 सिख थे तो दूसरी तरफ 12000 अफगान।
आपने “ग्रीक सपार्टा” और “परसियन” की लड़ाई के बारे में सुना होगा ……इनके ऊपर “300” फिल्म भी बनी है,पर अगर आप “सारागढ़ी” के बारे में पढ़ेगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई भारतभूमि में हुई थी …. बात 1897 की है …..नॉर्थ वेस्ट फ्रण्टियर स्टेट में 12 हजार अफगानों ने हमला कर दिया ……वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलों पर कब्जा करना चाहते थे।

इन किलों को महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था। इन किलों के पास सारागढ़ी में एक सुरक्षा चौकी थी। जहां पर 36वीं सिख रेजिमेण्ट के 21 जाट जवान तैनात थे। ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी जाट क्षत्रिय परिवार से थे। 36वीं सिख रेजिमेण्ट में केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे।

 

हवलदार ईशर सिंह गिल के नेतृत्व में तैनात इन 21 जवानों को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानों से जिन्दा बचना नामुमकिन है। फिर भी इन जवानों ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को भारतभूमि की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयों में शामिल हो गयी। एक तरफ 12 हजार अफगान थे …..तो दूसरी तरफ 21 भारतीय सिख वीर।

अफगान के अब्दाली की क्रूरता के बारे में आपको पता ही होगा। उस समय अफगानों से देश को बचाना सबसे जरूरी था। खासकर पंजाब पर इनका खतरा मंडराता रहता था। अंग्रेजों से कहीं ज्यादा इन अफगानों की क्रूरता और दुष्टता का खतरा रहता था।

यहां बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और इसमें लगभग 1600 से 2400 अफगान मारे गये और अफगानों की भारी तबाही हुयी ….. सब जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलों को बचा लिया। अफगानों की हार हुयी ….. जब ये खबर यूरोप पहुंची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी ……ब्रिटेन की संसद में सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरों की बहादुरी को सलाम किया। इन सभी को मरणोपरान्त इण्डियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया। जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था। भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकों द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अन्तिम फैसला था।

UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयों में शामिल किया। इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी …… पर मुझे दुःख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए …… उसके बारे में कम लोग ही जानते हैं …….ये लड़ाई यूरोप के स्कूलों में पढ़ाई जाती है पर हमारे यहां इसे जानते तक नहीं।

इन 21 वीरों के नाम इस प्रकार हैं।

०१, हवलदार ईशर सिंह गिल (रेजिमेण्टल नम्बर 165)
०२, नायक लाल सिंह (332)
०३, नायक चन्दा सिंह (546)
०४, लांस नायक सुन्दर सिंह (1321)
०५, लांस नायक राम सिंह (287)
०६, लांस नायक उत्तर सिंह (492)
०७, लांस नायक साहिब सिंह (182)
०८, सिपाही हीरा सिंह (359)
०९, सिपाही दया सिंह (687)
१०, सिपाही जीवन सिंह (760)
११, सिपाही भोला सिंह (791)
१२, सिपाही नारायण सिंह (834)
१३, सिपाही गुरमुख सिंह (814)
१४, सिपाही जीवन सिंह (871)
१५, सिपाही गुरमुख सिंह (1733)
१६, सिपाही राम सिंह (163)
१७, सिपाही भगवान सिंह (1257)
१८, सिपाही भगवान सिंह (1265)
१९, सिपाही बूटा सिंह (1556)
२०, सिपाही जीवन सिंह(1651)
२१, सिपाही नन्द सिंह (1221)

सिखों की यह वीरता व शहादत हम समस्त भारतियों के लिए गर्व की बात है।

(ईएमएस)