मानवता को शर्मसार करने वालो का हो सामाजिक बहिष्कार, तभी रुकेंगे ऐसे गुनाह


कुछ वाकये ऐसे होते है जो इंसानियत को शर्मसार कर देते है। हम पुस्तको में पढ़ते है राक्षसों के बारे में, हैवानों के बारे में। लेकिन कुछ ऐसे नरपिशाच वर्तमान में देखने को मिल जाते है,जिनके सामने हैवानियत भी शर्मसार हो जाये। उनके मन की निर्दयता की शायद ही कोई उपमा हम दे सके। त्रेतायुग का रावण ओर द्वापर का कंस भी जिनके सामने तुच्छ लगे।

हाल ही में एक मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में घटित हुआ है जहाँ दो पक्षों में 10 हजार के लोन को लेकर बहसबाजी हो गयी। जवाब में मोहम्मद जाहिद नाम के शैतान ने बच्ची को खेलते हुए देखा तो उसे बिस्कुट का लालच दिया और एकांत में ले जाकर उसकी निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी।

30 मई को ट्विंकल शर्मा नाम की इस मासूम बच्ची की हत्या करके जाहिद ने उसके शव को भूसे में छिपा दिया था। शव से दुर्गंध आने लगी तो, आरोपी ने साथी असलम के साथ मिलकर उसे बाहर कूड़े के ढेर के पास फेंक दिया। 2 जून को लड़की का शव बरामद किया गया, आरोपी व साथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की तैयारी है जबकि मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। पूछताछ में दोनों ने बताया कि उनका लड़कीं के पिता बनवारीलाल शर्मा से रुपये के लेन देन को लेकर झगड़ा हुआ था। बनवारी ने उनसे 10 हजार रुपये उधार लिए थे जो वह चुका नहीं पाए थे। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। पुलिस ने कहा कि अभी तक की जांच में बच्‍ची के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है।

तीन डॉक्टरों के पैनल की राय पर गौर करें तो शव गलने से उसकी हत्या के साक्ष्य विलुप्त हो चुके हैं। उसका सीधा हाथ या तो जानवरों ने खा लिया है, या फिर गलने से कहीं अलग छिटककर गिर गया है। पोस्टमार्टम के दौरान भी गलन के हालात कुछ ऐसे ही थे कि डॉक्टर जहां से भी शव को पकड़ रहे थे, वहां से हिस्सा अलग होने के कगार पर था।

इस तरह से मानवता को शर्मसार करने वाले हैवानों को फास्टट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला कर जल्दी सजा देनी चाहिए। सामाजिक स्तर पर ऐसे व्यक्तियों का बहिष्कार पीढ़ियों तक होना चाहिए ताकि इससे सीख लेकर कोई ऐसा कृत्य करने से पहले सो बार सोचे। सिर्फ मोमबत्ती लेकर श्रद्धांजलि देना ही पर्याप्त नही है। समाज के जो अग्रणी है, वो अगर इस प्रकार के गुनाहों के बारे में एक जाजम पर बैठ कर एकमत नही होंगे तब तक खाली कानून के भरोषे मुझे नही लगता कि लगाम लग पाएगी। सबसे बड़ी बात कि जो गुनाह को धर्म से जोड़ते है, वो भी थोड़ा सोच विचार कर बयान दे। आसिफा हो चाहे ट्विंकल, सभी भारत माता की ही सन्तान है। न्याय तथा न्याय की मांग सबके लिए समान होनी चाहिए। गुनाहगार कोई भी मजहब का हो, सजा कड़ी से कड़ी हो तथा सामाजिक बहिष्कार का प्रावधान जरूर होना ही चाहिए।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय