आसमान को गुमान न रहे क्योंकि चीन का होगा अपना चांद!


चीन ने यह कहकर कि वह अपना चांद खुद बना रहा है, जिससे शहरी मार्गों को रोशन किया जा सकेगा, एक तरह से सभी को चौंका दिया है।
प्रतिकात्मक तस्वीर (Image : Pixabay.com)

चीन में स्ट्रीटलाइट की समस्या से मिल सकती है निजात, होगी करोड़ो की बचत

मुंबई। चीन ने यह कहकर कि वह अपना चांद खुद बना रहा है, जिससे शहरी मार्गों को रोशन किया जा सकेगा, एक तरह से सभी को चौंका दिया है।

दरअसल अभी तक विभिन्न खोजों और सूचना प्रौद्योगिकी को मजबूत करने की दृष्टि से ही उपग्रहों का सहारा लिया जा रहा था और कोशिश की जा रही थी कि ज्यादा से ज्यादा सूचनाओं और नेट के जरिए साम्रग्री को यहां से वहां भेजने में उपग्रहों की सहायता ली जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है, बल्कि रात को रोशन करने में भी ये उपग्रह कारगर साबित हो सकते हैं, इस बात का दावा अब चीन ने कर दिया है। जो शक्तिसंपन्न हैं वो इनका उपयोग जासूसी करने में भी करते रहे हैं और दूसरे देशों को सबक सिखाने की गरज से भी बहुत कुछ आसमान में इनके द्वारा किया जाता रहा है। इनके प्रयोग कितने सफल रहे यह तो लगातार उपग्रहों पर चल रहा काम ही बता देता है।

संभवत: यह पहला प्रयोग होगा जिसमें कि मानव निर्मित चांद से रात रोशन करने की बात कही जा रही है और यह सीधे-सीधे मानव समाज को लाभांवित करने जैसा कार्य होगा। बहरहाल इससे सिद्ध होता है कि चीन न सिर्फ आर्थिक और व्यवसायिक तौर पर मजबूती से दुनिया में अपना वर्चस्व कायम कर रहा है बल्कि उसने अंतरिक्ष में काम आने वाली तकनीक पर भी अपने आपको खासा मजबूत कर लिया है। यही वजह है कि अभी तक चांद पर बस्तियां बसाने और लोगों को चांद की सैर कराने की बातें तो खूब होती रही हैं, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कोई देश उपग्रह के जरिए अपने देश का चांद भी तैयार कर सकता है, जो कि आसमान के चांद से आठ गुना ज्यादा रोशनी दे सकेगा और शहरी इलाकों से स्ट्रीट लाइट हटाने का रास्ता भी सुलभ हो जाएगा।

बहरहाल चीन ने इस प्रोजेक्ट को 2020 तक पूरा करने की बात कही है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक अच्छी पहल है और लोगों को इससे सबक लेते हुए इस दिशा में और बेहतर कार्य करने को आगे आना चाहिए। ऐसे कार्य जिनसे मानव समाज खासा लाभांवित होता हो और हिंसा को किसी तरह का बढ़ावा या प्रश्रय नहीं मिलती हो, अवश्य ही किया जाना चाहिए।

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वैसे भी परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने हथियारों की होड़ जो कर रखी है उससे मानव समाज को सिवाए नुक्सान के कुछ हासिल होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। सुरक्षा और शांति के नाम पर एक-दूसरे को आंख दिखाने का काम आखिर ऐसी ही ताकतों के कारण किया जाता है। इसलिए अपना चांद परियोजना को एक अच्छी पहल मानते हुए इसकी अच्छाइयों को उजागर किया जाना चाहिए जबकि इसकी खामियों पर भी विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि जहां चाह है वहां राह अवश्य ही मिल जाती है।

चीन अपने शहरी इलाकों से स्ट्रीट लाइट हटाने और बिजली पर होने वाले खर्च को कम करने के मकसद से इस कृत्रिम चांद को लॉन्च करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। खबर यदि सही है तो दक्षिण पश्चिमी सिचुआन प्रांत का चेंगदु शहर रोशनी प्रदान करने वाला उपग्रह विकसित कर रहा है। इस उपग्रह की खासीयत यही होगी कि यह भी वास्तविक चांद की ही तरह चमकेगा बल्कि दावा तो इस बात का किया जा रहा है कि सामान्यतौर पर पूर्ण चांद की जितनी रोशनी होती है उसकी तुलना में यह कृत्रिम चांद आठ गुणा ज्यादा रोशनी देगा।

चीन का अपना चांद परियोजना पर काम करने वाले संगठन तियान फु न्यू एरिया साइंस सोसाइटी के प्रमुख वु चुनफेंग के हवाले से कहा जा रहा है कि दुनिया का पहला मानव निर्मित चांद शिंचांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा और यदि यह प्रक्षेपण सफल रहता है तो आगे तीन और कृत्रिम चांद 2022 में प्रक्षेपित किए जाएंगे। इस प्रकार चीन शहरों में स्ट्रीट लाइट की समस्या से निजाद पाने वाला पहला देश भी बन जाएगा।

गौरतलब है कि स्ट्रीट लाइट पर बिजली खर्च और मैंटेनेंस एक बड़ी चुनौती होती है। इसमें जितनी ज्यादा मेहनत की आवश्यकता होती है उतना ही रख-रखाव और देख-रेख में खर्च भी करना होता है। इस प्रकार चीन ने दुनिया को अपने चांद का कांसेप्ट देकर एक बड़ी समस्या के समाधान की ओर विचार करने पर मजबूर किया है। चीन का यह प्रयोग यदि सफल रहता है तो फिर एक अनुमान के मुताबिक चीन को स्ट्रीट लाइट पर सालाना 17 करोड़ डॉलर खर्च नहीं करना पड़ेगा।

सूर्य की रोशनी से चमकने वाले ये उपग्रह करीब 50 वर्ग किलोमीटर तक के इलाके को रोशन करने में सक्षम होंगे और तब चीन सालाना 1.2 अरब यूआन की बचत कर सकेगा। इस परियोजना के सफल होने के बावजूद जो समस्या विकराल रुप लेकर तमाम देशों के समक्ष खड़ी होती दिख रही है वह प्रदूषण की है। दरअसल वायु प्रदूषण बढऩे के कारण इस परियोजना के मुताबिक रोशनी का निश्चित भाग तक पहुंच पाना भी कठिन होगा, क्योंकि जहां धूल और धूंए के गुबार होंगे, वहां कृत्रिम चांद की रोशनी कितनी मात्रा में शहरी सडक़ों तक पहुंच पाएगी कहना मुश्किल है।

बहरहाल यह तय है कि सूर्य के प्रकाश से चमकने वाले इस मानवतनिर्मित चांद को भविष्य का एक अच्छा प्रयोग कहा जा सकता है। जो इसमें सफल रहेंगे उनके लिए तो उनका सबसे खूबसूरत चांद वही होगा, जबकि ऐसा नहीं कर पाने वालों के लिए तो चांद का मुंह टेढ़ा ही नजर आने वाला है।

-ईएमएस