नागफनी के जूस से दौड़ रही हैं डीजल गाड़ियां


मैक्सिको की एक कंपनी ने नागफनी के रस से मीथेन गैस बनाकर गाड़ियों को दौड़ाने में सफलता हासिल की है।

नई दिल्ली । भारत सरकार तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनाल मिलाने और बायोफ्यूल को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। भारत में जेट्रोफा से बायोडीजल के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मैक्सिको की एक कंपनी ने नागफनी के रस से मीथेन गैस बनाकर गाड़ियों को दौड़ाने में सफलता हासिल की है। नोपली मैक्स नाम की कंपनी ने 2015 में कारों को चलाने के लिए नागफनी (कैक्टस) जूस का इस्तेमाल शुरू किया था।नागफनी से जैव ईंधन तैयार किया जाता है। इस जैव ईंधन का उपयोग मेक्सिको में नगर बसों और सरकारी वाहनों में शुरू कर दिया गया है। मैक्सिको की कंपनी फिलहाल प्रतिदिन 8 टन मीथेन का उत्पादन कर रही है।

ईंधन के साथ खाद

कंपनी का कहना है कि नोपल से ईंधन बनाने से जो कचरा बचता है। वह एक बेहतरीन खाद के रूप में उपयोग किया जा रहा है। किसी भी तरह के कृत्रिम रसायनों से मुक्त यह खाद पूरी तरह से प्राकृतिक होती है।

केक्ट्स से जैव ईंधन

नोबेल केक्टस स्कोर पहले साफ किया जाता है। उसके बाद जैविक खाद के साथ मिलाकर सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। कुछ दिनों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें से मेथेन गैस पैदा होती है। जिसे वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इस विधि से गैस बनाने पर भारतीय मुद्रा में 44.76 रुपये प्रति लीटर का खर्च आता है। जो पारंपरिक ईंधन के मुकाबले बहुत कम है। बाय प्रोडक्ट के रूप में जो खाद मिलती है। उससे इसकी कीमत और भी कम हो जाती है।

– ईएमएस