दूध के दांत से कैंसर का इलाज-गर्भनाल होगी संजीवनी की तरह


बच्चों के दूध के दांत सहेज कर रखने से भविष्य में बच्चों के दांत में मौजूद स्टेम सेल का उपयोग कैंसर जैसे रोगों के रोकने में किया जा सकता है।
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नई दिल्ली। बच्चों के दूध के दांत सहेज कर रखने से भविष्य में बच्चों के दांत में मौजूद स्टेम सेल का उपयोग कैंसर और दिल के दौरे जैसे रोगों के रोकने में किया जा सकता है। दूध के दांतों में पाए जाने वाले स्टेम सेल जैविक जानकारी से परिपूर्ण होते हैं। इसमें कैंसर से लड़ने की क्षमता और मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं को फिर से सक्रिय करने की शक्ति होती है।

दूध के दांत से नए दांत

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के अनुसार शोधकर्ताओं ने दूध के दांत में स्टेम कोशिकाएं व्यस्क दांतो की तुलना में पर्यावरण क्षति कम होती है नई कोशिकाओं को दोबारा बनाने में दूध के दांत मदद कर सकते हैं विगत वर्ष चीन में हुए एक परीक्षण में दूध के दांतों का उपयोग नए दांतो को पुनर्जीवित करने में सफलता पूर्वक किया गया था।

गर्भनाल संजीवनी की तरह

डॉक्टरों ने गर्भनाल को कैंसर लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करने के लिए उपयुक्त पाया है। कोख में बच्चे को नाभि के जरिए मां से जोड़ने वाली गर्भनाल चमत्कारिक रोल अदा करती है जन्म के बाद गर्भनाल को काटकर फेंक दिया जाता है। पहले इसे परंपरा के अनुसार घर के ही किसी कोने में दफन किया जाता था। वैज्ञानिकों की नई खोज ने गर्भनाल को बहुत महत्वपूर्ण बना दिया है। इससे अनुवांशिक बीमारियों और मेडिकल हिस्ट्री को समझने की मदद मिलती है। गर्भनाल के माध्यम से कैंसर और लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज हो सकता है।

गर्भनाल को सुरक्षित रखने का चलन सारी दुनिया में बढ़ा है। दुनिया के विकसित देशों में गर्भनाल को सुरक्षित रखने का चलन बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है भारत में भी मुंबई दिल्ली अहमदाबाद और जयपुर सहित 25 शहरों में प्लेसेंटा बैंकिंग (गर्भनाल को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया)भी शुरू हो चुकी है।

गर्भनाल में मौजूद स्टेम कोशिकाओं की सहायता से डॉक्टरों ने शोध के बाद घातक बीमारियों के इलाज में अप्रत्याशित सफलता अर्जित की है।दुनिया भर में अब दूध के दांतों के बैंकों की स्थापना होना संभव होगी वहीं गर्भनाल के जरिए घातक बीमारियों से बचने का भी एक बड़ा रास्ता मेडिकल साइंस को मिला है।

– ईएमएस