सावधान! ई-सिगरेट से भी हो सकता है कैंसर


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नई दिल्‍ली (ईएमएस)। क्या आप ई-सिगरेट का सेवन करते है तो सावधान हो जाइए। ध्रूमपान के विकल्प के रूप में पेश की जाने वाली ई-सिगरेट भी सेहत के लिए घातक हो सकती है। एक शोध के मुताबिक, ई-सिगरेट में भी अस्थमा समेत ऐसी बीमारियों के कारक हो सकते हैं, जिनसे फेफड़े को खतरा होता है। अध्ययन में अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ई-सिगरेट के 75 लोकप्रिय उत्पादों को शामिल किया। इनमें एक बार प्रयोग होने वाले और रीफिल किए जा सकने वाले उत्पाद शामिल थे। अध्ययन में 27 फीसद उत्पादों में एंडोटॉक्सिन पाया गया। यह एक माइक्रोबियल एजेंट है, जो ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया पर पाया जाता है। वहीं 81 फीसद उत्पादों में ग्लूकन के कण पाए गए। ग्लूकन अधिकतर फंगस की कोशिकाओं की दीवारों पर मिलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ई-सिगरेट उत्पादों में इन तत्वों की उपस्थिति यह बताने की लिए पर्याप्त है कि इनके कारण भी अस्थमा और फेफड़े की अन्य बीमारियां हो सकती हैं।

सिगरेट की लत छुड़ाने के लिए बाजार में आई ई-सिगरेट युवाओं के बीच काफी पसंद की जा रही है, लेकिन यह भी कम खतरनाक नहीं है। इसमें प्रयुक्त केमिकल जानलेवा हैं, इसके दुष्प्रभावों से पॉपकॉन लंग्स एवं लंग्स कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ई-सिगरेट के दुष्प्रभाव पर जीएसवीएम के रेस्पेरेटरी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. सुधीर चौधरी अध्ययन कर रहे हैं। उनके मुताबिक ई-सिगरेट युवक, युवतियां और गर्भवती भी इस्तेमाल कर रही हैं। इसका उत्पादन करने वाली कंपनी व्यावसायिक लाभ के लिए इसे हानिकारक नहीं बताते हैं जबकि यह सिगरेट के बराबर हानिकारक है।

ई-सिगरेट एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर है, जिसमें निकोटीन और अन्य केमिकलयुक्त लिक्विड भरा जाता है। ये इन्हेलर बैट्री की ऊर्जा से इस लिक्विड को भाप में बदल देता है जिससे पीने वाले को सिगरेट पीने जैसा एहसास होता है। लेकिन ई-सिगरेट में जिस लिक्विड को भरा जाता है वो कई बार निकोटिन होता है और कई बार उससे भी ज्यादा खतरनाक केमिकल। इसलिए ई-सिगरेट को सेहत के लिहाज से बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। वर्ष 2003 में चीन में ई-सिगरेट का अविष्कार हुआ। यह बैटरी से चलने वाला निकोटिन डिलीवरी का यंत्र है। इसमें द्रव्य पदार्थ, जिसे भाप कहते हैं, को गर्म करने के बाद मुंह से खींचा जाता है। इसे यह सोचकर बनाया गया था कि बिना टॉर या कार्बन के फेफड़े तक कम मात्रा में निकोटिन जाएगा। व्यावसायिक फायदे के लिए ऐसे तरीके अपनाए गए, जिससे अधिक मात्रा में निकोटिन फेफड़े में जाने लगा।