ब्रेन स्ट्रोक : बड़े-बुजुर्ग ही नहीं, युवा भी निशाने पर


देश भर में ब्रेन स्ट्रोक के मामले चिंताजनक ढंग से बढ़ रहे हैं। इसके निशाने पर मात्र बड़े-बुजुर्ग ही नहीं, अब युवा भी हैं।
Photo/.Twitter

नई दिल्ली। देश भर में ब्रेन स्ट्रोक के मामले चिंताजनक ढंग से बढ़ रहे हैं। इसके निशाने पर मात्र बड़े-बुजुर्ग ही नहीं, अब युवा भी हैं। ऐसे में जानकारी का अभाव हालत को और गंभीर बना देता है। ब्रेन स्ट्रोक दिमाग के किसी भाग में खून का प्रवाह रुक जाने, थक्का जमने या खून का दबाव बढ़ने के कारण रक्त वाहिका फटने से होता है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी होने लगती हैं और वे नष्ट होने लगती हैं। इस कारण उस हिस्से का मस्तिष्क ढंग से काम करना बंद कर देता है। इसका असर सुन्नता, कमजोरी, चलने-फिरने व बोलने में परेशानी व लकवे के रूप में देखने को मिलता है। जब रक्त धमनियों में सिकुड़न हो जाती है या फिर धमनियों में वसा का जमाव हो जाता है तो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है, इस अवस्था को इस्कीमिक स्ट्रोक कहते हैं। लेकिन जब दबाव के कारण मस्तिष्क की धमनियां फट जाती हैं तो इसे ब्रेन हैमरेज कहते हैं। इन नलिकाओं के क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण ‘आर्टियोस्क्लेरोसिस’ है। इस कारण नलिकाओं की दीवारों में वसा, संयोजी ऊतकों, क्लॉट, कैल्शियम या अन्य पदार्थों का जमाव हो जाता है। इससे रक्त संचरण में रुकावट आती है या रक्त कोशिकाओं की दीवार कमजोर हो जाती है।

मरीज को ऐसे अस्पताल में ले जाना जरूरी होता है, जहां सीटी स्कैन और ईसीजी आदि की सुविधाएं हों। जितना जल्दी हो, किसी अच्छे न्यूरोसर्जन से संपर्ककरना जरूरी है। लगभग 85 प्रतिशत स्ट्रोक इस्कीमिक होते हैं। शेष 15 प्रतिशत स्ट्रोक ब्रेन हैमरेज के कारण होते हैं। ब्रेन हैमरेज का मुख्य कारण उच्च रक्तचाप है। इस्कीमिक स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क की धमनियां संकरी या अवरुद्ध हो जाती हैं, जिसकी वजह से रक्त प्रवाह में कमी हो जाती है। इसे इस्कीमिया कहा जाता है। इस्कीमिक स्ट्रोक के अंतर्गत थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक को शामिल किया जाता है। जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में से किसी एक में रक्त का थक्का बनता है तो थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक पड़ता है। यह थक्का धमनियों में वसा के जमाव के कारण होता है, जिसके कारण रक्त प्रवाह में बाधा आ जाती है। इस स्थिति को एथेरोस्क्लीरोसिस कहा जाता है।

कई बार रक्त के थक्के किसी दूसरे अंग में बनते हैं, पर धमनियों से होते हुए मस्तिष्क तक पहुंचकर वहां की धमनी को संकरा कर देते हैं। आमतौर पर ये थक्के हृदय में बनते हैं। ट्रॉन्जिएन्ट इस्कीमिक अटैक यानी टीआईए को मिनी स्ट्रोक के रूप में भी जाना जाता है। मस्तिष्क के किसी हिस्से में थोड़े समय के लिए रक्त की आपूर्ति में कमी होने पर टीआईए की स्थिति उत्पन्न होती है, जो पांच मिनट से भी कम समय तक के लिए रहती है। इसे खतरे का संकेत समझकर किसी अच्छे न्यूरॉलॉजिस्ट से संपर्क करें। इसमें कम समय के लिए उसी तरह के लक्षण होते हैं, जैसे लक्षण ब्रेन स्ट्रोक के समय होते हैं।

– ईएमएस