गांधी विरोधियों के आरोपों को तार्किक जवाब देती पुस्तक – ‘कस्तूरबा और गांधी की चार्ज शीट’


(पुस्तक समीक्षा ) 

दीपक राय, भोपाल, (ईएमएस) आयकर विभाग के मुख्य आयकर आयुक्त आर के पालीवाल, गांधीवादी चिंतक और वरिष्ठ लेखक भी हैं। हाल ही में उनकी नवीनतम कृति ‘कस्तूरबा और गांधी की चार्ज शीट’ जनता के बीच आई है। इस किताब का लोकार्पण समारोह 24 अप्रैल 2019 को मेयर हाल, अंधेरी पश्चिम, मुम्बई में हुआ। जेवीपी पब्लिकेशन्स के अध्यक्ष जितेंद्र पात्रो की ओर ये कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सुप्रसिद्ध कथाकार- चित्रकार और ड्रॉप डेड फाउंडेशन के चेयरमैन आबिद सुरती मुख्य अतिथि थे। कृति के जनक आरके पालीवाल ने ईएमएस से संक्षिप्त बातचीत की।

प्रस्तुत है पुस्तक की संक्षिप्त समीक्षा…

‘कस्तूरबा’ और ‘गांधी की चार्जशीट’ वरिष्ठ लेखक और गांधीवादी चिंतक आर. के. पालीवाल के दो शोधपरक नाटक हैं जो गहन शोध के बाद क्रमश: कस्तूरबा गांधी और महात्मा गांधी को केंद्र में रखकर लिखे गए हैं।

‘कस्तूरबा’ नाटक का परिवेश भारत के स्वाधीनता संग्राम के निर्णायक दौर का है, जिस समय 1942 मे महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ और ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ नारे के साथ बड़ा आंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजों ने देश भर में दमन चक्र चलाकर गांधी और कस्तूरबा को अनिश्चित काल के लिए नजरबंद कर दिया था और आजादी के आंदोलन के लगभग सभी बड़े नेताओं को जेलों में ठूंस दिया था। नजरबंदी के दौरान कस्तूरबा एक तरफ गम्भीर बीमारी से जूझ रही थीं और दूसरी तरफ महादेव देसाई की असमय मृत्यु चिंता का विषय था। बड़े बेटे हरिलाल के गलत पथ पर भटकना भी बड़ी चिंता थी। नाटक में कस्तूरबा की मन:स्थिति का अत्यंत मार्मिक चित्रण हुआ है।

‘गांधी की चार्जशीट’ नाटक में लेखक ने उन सभी मुद्दों पर सधी हुई दृष्टि डाली है जिनको लेकर गांधी के विरोधी जब तब तरह तरह के आरोप लगाते रहते हैं। इन तमाम संवेदनशील मुद्दों को लेखक ने बड़े तार्किक ढंग से एक जीवंत मुकदमे के माध्यम से चित्रित किया है। इन नाटकों में कस्तूरबा के विराट व्यक्तित्व के विशिष्ट पहलुओं पर प्रकाश डालने के साथ ही महात्मा गांधी पर लगाए जाने वाले विभिन्न आरोपों पर तर्कपूर्ण जवाब तलाशने की कोशिश की गई है।