लेबर डौला : गर्भवती महिलाओं की सहायिका


डौला’ एक ग्रीक भाषा का शब्द है जिसका तात्पर्य होता है-सेवा करने वाली महिला। पुराने जमाने में राजा-महाराजा भी गर्भवती रानी एवं शिशओं के देखभाल के लिए महिला की नियुक्ति करते थे जिसे ‘धाय’कहा जाता था। आज के दौर में `डौला’ उन पेशेवरों को कहा जाता है, जो गर्भवती महिला को गर्भधारण से लेकर शिशु के जन्म से कुछ दिन बाद तक की अवधि के दौरान भावनात्मक, सूचनात्मक और शारीरिक रूप से सहारा देने का कार्य करती हैं। इस कार्य में उनकी ओर से गर्भवती महिला को किसी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह या उपचार देने की कोशिश नहीं की जाती है। इन्हें बतौर पेशेवर `लेबर डौला’ के नाम से जाना जाता है। लेबर डौला का काम सिर्पâ गर्भस्थ महिला को सहारा देने तक ही सीमित नहीं होता है। उन्हें शिशु का जन्म हो जाने तक संबंधित महिला के परिवार का भी ख्याल रखना पड़ता है। प्रशिक्षित डौला गर्भवती महिला और उसके परिवार को घर से अस्पताल तक भावनात्मक सहारा देने के कार्य में प्रशिक्षित होती हैं।
इसके अलावा वह हॉाqस्पटल के नए माहौल से सामंजस्य बैठाने में भी गर्भवती महिला और उसके परिवार की मदद करती हैं। एक तरह से वह गर्भवती महिला और उसके पति के लिए एडवोकेट, लेबर कोच और सूचना स्रोत की भूमिका निभाकर, उन्हें प्रसव तक की प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त सुवूâन और सहारा देने का कार्य करती हैं।
लेबर डौला की भूमिका
गर्भावस्था के दौरान माता-पिता बनने जा रहे दंपति से डौला गर्भावस्था की दूसरी या तीसरी तिमाही में संपर्वâ करती हैं, ताकि वह गर्भवती महिला से गर्भावस्था से पहले और बाद के अनुभवों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सके। इन जानकारियों के आधार पर वह संबंधित महिला को प्रसव से पूर्व की तैयारियों मसलन आराम वैâसे करें, िंचताओं से वैâसे दूर हों और श्वास वैâसे लें आदि के बारे में प्रशिक्षित करती हैं। सबसे अहम बात यह कि वह गर्भवती महिला को सहारा देने के साथ-साथ उन्हें प्रसव से संबंधित जरूरी जानकारियां भी देती हैं।
प्रसव के समय: जब गर्भवती महिला गर्भावस्था के अंतिम चरण यानी प्रसव की अवस्था के करीब पहुंच जाती है, तब डौला हर समय संबंधित महिला के साथ रुकने के लिए उसके घर या अस्पताल में आ जाती हैं। इस दौरान वह गर्भवती की कई प्रकार से सहायता करती हैं।
– तनावमुक्त और आराम से रहने में सहायता करती हैं।
– पोषणयुक्त भोजन और आहार चुनने का कार्य करती हैं।
– गर्भवती महिला और अस्पताल में उसकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों के बीच संवादकर्ता की भूमिका निभाती हैं।
– डौला एक प्रकार से सहयोगी होती हैं, जो हमेशा स्वास्थ्य र्किमयों के साथ मिलकर काम करती हैं। प्रसव से पूर्व अगर गर्भवती महिला को किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है, तो डौला उसके परिवार को समस्या समझने में मदद करती हैं और उन्हें तत्काल संभावित उपायों के विकल्प देती हैं।
शिशु जन्म के बाद: अधिकतर डौला शिशु के जन्म के बाद भी संबंधित महिला की सहायता करती हैं। इस दौरान वह शिशु को संभालने और उसे स्तनपान कराने में संबंधित महिला की मदद करती हैं।

प्रशिक्षित डौला बनने की योग्यता
इसके लिए नियमित शिक्षा या पत्राचार (डिस्टेंस) माध्यम से र्सिटफिकेट पाठ्यक्रम की पढ़ाई की जा सकती है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए निम्न योग्यताओं का होना जरूरी है। न्यूनतम आयु १८ वर्ष हो। चाइल्डबर्थ एंड पोस्टपार्टम एसोसिएशन (कप्पा इंडिया) द्वारा संचालित र्सिटफिकेट पाठयक्रम में पंजीबद्ध हो।