रचनात्मक पेशे से जुड़े होते हैं रोग!


मुंबई। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि रचनात्मक पेशे से जुड़े लोगों को आम जनता की तुलना में मानसिक बीमारियों का अधिक इलाज कराना पड़ता है। इससे लेखन और सिजोप्रेâनिया के बीच संबंध का खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर दस लाख २० हजार मरीजों और उनके रिश्तेदारों पर किए गए अध्ययन के बाद यह नतीजा निकाला है। अध्ययन के नतीजों से पता चला है कि कई मानसिक बीमारियां जैसे बायपोलर डिस्आर्डर उन लोगों के पूरे समूह में अधिक पैâली हुई है जो कलात्मक या वैज्ञानिक पेशे से ताल्लुक रखते हैं। इनमें नृत्यांगनाएं , शोधकर्ता, फोटोग्राफर और लेखक शामिल हैं। इसमें पाया गया है कि लेखकों को सिजोप्रेâनिया, अवसाद , बेचैनी तथा सब्सटेंस अब्यूज की बीमारी अधिक होती है और सामान्य लोगों के मुकाबले लेखकों के आत्महत्या करने की आशंका ५० फीसदी ज्यादा रहती है। इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने यह भी गौर किया कि सिजोप्रेâनिया, बायपोलर डिस्आर्डर, एनोरोqक्सया नर्वोसा और कुछ हद तक आटिज्म से पीड़ित मरीजों के करीबी रिश्तेदारों में रचनात्मक पेशे से जुड़े लोग अधिक होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन से मानसिक बीमारियों के प्रति अवधारणा को नए सिरे से समझने में मदद मिल सकती है।