मस्तिस्क में ही छिपा है मोटापे का राज


नई दिल्ली। माqस्तष्क में ऐसी कोशिकाओं का पता चला है जो मोटापा रोकने में मददगार साबित हो सकती है। विज्ञानियों का दावा है कि ये कोशिकाएं मानसिक गतिविधियों व भोजन संबंधी आदतों के बीच कड़ी का काम करती हैं। ये भोजन की इच्छा व आवश्यकता की नियंत्रक भी हैं। जानकारी के अनुसार प्रयोग चूहे पर किया गया। शोध ओजीटी एंजाइम पर आधारित है। यह एक जैविक उत्प्रेरक है जो इंसुलिन और रक्त संरचना समेत शरीर की कई क्रियाओं में शामिल है। अगला प्रयोग मानव पर किया जाएगा, कामयाब रहा तो मोटापा कम करना या रोकना संभव हो पाएगा, संभावना है कि नई दवाएं भी बाजार में दिखाई दें। अनुसंधानकर्ता प्रोपेâसर ने कहा, हमने प्रयोगशाला में चूहे के माqस्तष्क में जो कोशिकाएं खोजीं वे भोजन संबंधी व्यवहार को नियंत्रित करती हैं। इसमें ऐसे प्रोटीन पर भी अध्ययन किया गया जो माqस्तष्क कोशिकाओं के गुणसूत्री संयोजन या विभिन्न हिस्सों को कमजोर अथवा ताकतवर बनाता है। शोध इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसका माqस्तष्क के खास हिस्सों हिप्पोवैâम्पस और बाहरी आवरण (कोर्टेक्स)की कोशिकाओं के गुणसूत्री संयोजन से सीधा संबंध है। इसके अलावा माqस्तष्क के उस भाग(हिपोथेलामस) का भी गहन अध्ययन किया गया जो शरीर के तापमान, भोजन व पाचन संबंधी क्रिया व नींद को नियंत्रित करता है। ओजीटी एंजाइम का मुख्य कार्य एक अणु(मोलिक्यूल) न-एसिटिलग्लूक सामाइन(ग्लूकोज का ही एक रूप) को प्रोटीन में मिलाना है।
प्रयोग के दौरान विज्ञानियों ने ओजीटी एंजाइम की संवाहक कोशिकाओं को वयस्क चूहे के माqस्तष्क से हटा दिया। इसके तीन सप्ताह के बाद ही वसा के कारण चूहे का वजन दोगुना हो गया। एक अन्य शोधकर्ता ने बताया कि ओजीटी की अनुपाqस्थति के कारण चूहे की यह अनुमान लगाने की क्षमता प्रभावित हुई कि उसे कितना भोजन करना चाहिए। उसने हर बार अधिक समय तक और अधिक वैâलोरी का भोजन किया। प्रोपेâसर हगेनिर ने बताया कि शोध से यही निष्कर्ष निकला कि ओजीटी ही स्नायु तंत्र और भोजन प्रक्रिया का संजाल दुरुस्त रखता है। इसके संवाहक सेल भोजन लेने या अधिक भोजन न लेने के संदेश माqस्तष्क के अन्य हिस्सों को भेजते हैं। कमजोर गुणसूत्री संयोजन से संदेश भेजने का काम शिथिल हो जाता है और भोजन के साथ मोटापा भी बढ़ता जाता है।