बीमारियों को न्योता है मुंह खोल कर सोना


नई दिल्ली। यदि आपको मुंह खुला रख कर सोने की आदत है तो सावधान हो जाइये। यह आपके दांतों के लिए घातक साबित हो सकती है। विज्ञानियों ने शोध में पाया कि ऐसे सोने से मुंह में एसिड का स्तर बढ़ जाता है जो दंत क्षरण का कारण बनता है।
शुष्कता आने के कारण मुंह में बैक्टीरिया खत्म करने तथा एसिड को नियंत्रित करने की लार की कुदरती क्षमता खत्म हो जाती है। यह ठीक उसी तरह नुकसानदायक बताया गया जैसे सोने से पहले कार्बोनेटेड कोल्ड िंड्रक पीना।
रात को मुंह से सांस लेने से ऐसे बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं जो एसिड बढ़ाते हैं। ऐसे कुछ व्यक्तियों का एसिड स्तर तो एच-३.६ तक बढ़ जाता है। जैसे ही एसिड स्तर बढ़ता है, दांतों का क्षरण शुरू होने के साथ सड़न की प्रक्रिया भी आरंभ हो जाती है। न्यूजीलैंड की ओटेगो यूनिर्विसटी की अनुसंधानकर्ता जोआने चोई और उनकी टीम ने रात को दांतों पर चिपकाई जा सकने वाली तथा मुंह की एसिडिटी मापने वाली डिवाइस तैयार की। डिवाइस का नेटवर्वâ वंâप्यूटर से जोड़ा गया।
फिर दस लोगों को नाक पर क्लैंप लगाकर सोने के लिए कहा गया ताकि रात भर मुंह से सांस लें। अगले दिन उन्हें सामान्य तरीके से सोने दिया गया। दोनों दिनों के आंकड़ों में अंतर साफ नजर आया। कई स्तरों पर निरंतर की गई शोध का निष्कर्ष यही रहा कि सामान्य तरीके से सोने वालों के मुकाबले मुंह खुला रख कर सोने वालों में दंत क्षरण, इनेमल क्षतिग्रस्त होने तथा सड़न की संभावना काफी अधिक है। दमा व सांस में रुकावट के रोगी आम तौर पर रात को मुंह से ही सांस लेते हैं।