धूम्रपान से हो सकता है इम्फीसेमा


नई दिल्ली। एक खास अध्ययन में सामने आया है कि इम्फीसेमा बीमारी का प्रमुख कारण धूम्रपान है। भारत के एक तिहाई लोग तंबावूâ उत्पादों का सेवन करते हैं। शहरी क्षेत्रों में सिगरेट और चबाने वाला तंबावूâ आम बात है तो ग्रामीण क्षेत्रों में बीड़ी, हुक्का और चिलम काफी मात्रा में प्रयोग की जाती है। जो लोग धूम्रपान या तंबावूâ का सेवन नहीं भी करते हैं, उनमें भी यह बीमारी पाई जाती है। उनके मामले में अल्फा १ एंटीट्राइाqस्पन नामक प्रोटीन की कमी की वजह से एम्फीसेमा हो सकता है। पेâफड़ों में लंबे समय तक सूजन रहता हो, लगातार बलगम वाली खांसी आती हो तो जांच कराएं, यह इम्फीसेमा रोग का लक्षण भी हो सकता है। इसके अलावा पेâफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों के संपर्वâ में आना, वायु प्रदूषण से सांस पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव और उचित हवादार माहौल न होना पेâफड़ों की सेहत पर असर डाल सकते हैं। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल और आईएमए के ऑनरेरी सेव्रेâटरी जनरल और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया, “हम लोगों को अपनी जीवनशैली बदलने की सलाह देते हैं। पेâफड़ों को नुकसान पहुंचने से बचाने के लिए सबसे पहले धूम्रपान छोड़ दें। ताकत और ऊर्जा विकसित करने के लिए नियमित तौर पर व्यायाम करना शुरू करें।” इम्फीसेमा के लक्षणों पर अगर ध्यान दिया जाए तो सांस का टूटना या बिल्कुल सांस ना ले पाना, छाती में जकड़न, घबराहट, बलगम वाली खांसी, गले में अत्यधिक चिपचिपाहट, बलगम, सांस प्रणाली में बार-बार सामान्य या गंभीर संक्रमण होना, उंगलियों के नाखूनों और होठों का नीलापन, सुस्ती महसूस होना, अचानक वजन कम होना आदि इसके लक्षणों को प्रदर्शित करता है। डॉ अग्रवाल का कहना है कि बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है और इस सीओपीडी दिवस के मौके पर आईएमए अपने सभी ढाई लाख सदस्यों को मरीज के साथ इस बीमारी संबंधी काउंसिंलग तकनीक के लिए प्रशिक्षिण देगा।