दिल के मरीजों के लिए दर्द निवारक दवाएं धीमा जहर


लंदन। सामान्य दर्द निवारक की दवाएं दिल के मरीजों के लिए धीमा जहर बन सकती हैं। दावा किया गया है कि ऐसी दवाएं अल्सर और रक्तचाप बढ़ाने का कारण बन सकती है। जानकारी के अनुसार हृदय रोगी को ये दवाएं लेते वक्त विशेष सतर्वâता बरतनी चाहिए। एक शोध में तमाम चेतावनियां दी गई हैं। यूरोप के १४ देशों की यूनिर्विसटी और अस्पतालों ने संयुक्त रूप से यह शोध किया। मांसपेशी में िंखचाव से लेकर चोट के दर्द व सूजन को दूर करने व अन्य कई रोगों के लिए आजकल नॉन स्टेरॉयड एंटी इनफ्लेमेटरी ड्रग्स(एनएसएआइडी) धड़ल्ले से दी जा रही हैं। ये एंटीबायोटिक नहीं होतीं जिस कारण बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण को ठीक नहीं कर सकतीं।
मरीजों को बुखार में भी ये दवाएं लिख दी जाती हैं। शोधकर्ता मोर्टेन ाqश्मट के मुताबिक आर्थराइटिस की दवा हृदय रोगियों के लिए घातक है। एनएसएआइडी जिसे सीओएक्स-२ नाम से भी जाना जाता है, हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देती है। हालांकि कुछ दवाओं को बाजार से हटा भी लिया गया लेकिन अब भी कई दवाएं, विशेष तौर पर डाइक्लोफिनाक मेडिकल स्टोरों पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है, यह दवा भी दिल के लिए बड़ा खतरा है।
शोध के अनुसार िंचता की बात यह भी है कि पुरानी दवाएं कई देशों में चिकित्सक के बिना लिखे ही आसानी से मिल जाती हैं। नया शोध हृदय रोगियों को सामने रखते हुए इन दवाओं के उपयोग के औचित्य को ध्यान में रखते हुए किया गया। शोध में बताया गया कि पहली बार यूरोपीय सोसायटी ऑफ र्कािडयोलोजी ने कई मानक तय किए हैं और चिकित्सकों को दर्द निवारक दवा लिखते वक्त इनका पालन करना होगा। डेनमार्वâ की ही आल्बोर्ग यूनिर्विसटी के क्रिाqश्चयन टोर्प ने बताया कि एनएसएआइडी दवा लिखने वाले चिकित्सक को हृदय रोग व रक्तस्राव के खतरे से संबंधित आकलन भी हर मरीज को बताना होगा। सामान्यतया यह दवा हृदय रोगियों को तो लिखी ही नहीं जानी चाहिए।