त्वचा कैंसर का पता लगाएगा केला


नई दिल्ली। केले में मानव त्वचा वैंâसर (मेलानोमा) को बहुत जल्द पहचानने का गुण है। पके हुए केले के छिलके में काले रंग के चकत्ते होते हैं जो एक एंजाइम (टिरोसिनेस) के कारण बनते हैं। मानव की त्वचा में भी यही एंजाइम मौजूद है। ाqस्वटजरलैंड के शोधकर्ताओं ने दोनों समानताओं को साथ लेकर वैंâसर स्वैâनर बनाया। पहले केले के चकत्तों पर प्रयोग किया फिर उसके निष्कर्षों के आधार पर उपचार विधि तैयार की। परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। चकत्ते ाqस्कन वैंâसर की पहचान बहुत जल्द करने में सक्षम पाए गए। समय पर बीमारी का पता लगने और इलाज से हजारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी। लेबोरेटरी ऑफ फिजिकल एंड एनालिटिकल इलेक्ट्रोवैâमिस्ट्री के विज्ञानियों ने शोध में निष्कर्ष निकाला कि यह एंजाइम मेलानोमा के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। त्वचा वैंâसर तीन स्तरों पर दिखाई देता है। पहली स्टेज में एंजाइम दिखाई नहीं देता, दूसरी अवस्था में वैंâसर का काफी विस्तारित रूप सामने आता है जो िंचता का कारण बन जाता है।