तनाव से कम हो सकती है गर्भधारण की संभावना : अध्ययन


बोस्टन । गंभीर अवसाद से पीड़ित महिलाओं के गर्भ धारण करने की संभावना कम हो सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि गंभीर अवसाद से पीड़ित महिलाओं में आलोच्य मासिक चक्र के दौरान गर्भाधान की संभावना सामान्य महिलाओं की तुलना में ३८ प्रतिशत तक है। उन्होंने बताया कि अनुसंधान में इस चीज पर महिलाओं द्वारा अवसाद की ाqस्थति में ली जाने वाली दवाओं का भी कोई असर नहीं दिखा। अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय की येल निल्लनी का कहना है कि पूर्व के अध्ययन में बांझपन और अवसादरोधी दवाओं के संबंध के बावजूद वर्तमान में अवसादरोधी दवाओं का गर्भधारण की संभावना पर कोई नकारात्मक प्रभाव होता नहीं दिख रहा है। निल्लनी ने कहा, `हमारे अध्ययन के अनुसार अवसाद के मध्य से गंभीर लक्षण के कारण गर्भधारण करने में देर हो सकती है और इस पर इस बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ता कि वर्तमान में कौन सी अवसाद रोधी दवाएं उन्हें दी जा रही हैं।’

गर्भावस्था के दौरान फल का सेवन करने से बच्चा बनेंगा स्मार्ट
टोरंटो । एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था के दौरान आप जितना ज्यादा फल खाएंगी आपके बच्चे का आईक्यू स्तर उतना ही ज्यादा होगा। इस अध्ययन के निष्कर्षो में बताया गया है कि अगर गर्भवती महिलाएं औसतन छह या सात बार फल या फलों का जूस रोजाना लेती हैं तो उनके बच्चे का एक साल की उम्र में आईक्यू उसे नापने वाले स्केल में ६ या ७ अंक अधिक होता है। कनाडा के अलबर्टा यूनिर्विसटी के मुख्य शोधकर्ता पीयूष मंधाने ने बताया, हमने पाया है कि संज्ञानात्मक विकास के बारे में इससे सबसे अधिक पता चलता है कि गर्भावस्था के दौरान बच्चे की मां ने कितना फल खाया है। जितना ज्यादा फल मां खाती हैं उतना ही उनके बच्चे का संज्ञानात्मक विकास अधिक होता है। शोधदल ने ६८८ बच्चों के आंकड़ों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें पाया गया कि जो मांएं गर्भावस्था के दौरान ज्यादा फल खाती हैं उनके बच्चे एक साल की उम्र में विकासात्मक परीक्षण पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं। मंधाने कहते हैं, हमें यह जानकारी पहले से है कि गर्भाशय में बच्चा जितना ज्यादा समय तक रहता है उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है और इसके साथ अगर मां रोजाना लिए जाने फलों की मात्रा को बढ़ा दे तो बच्चों को वही लाभ मिलता है जो उसे गर्भाशय में एक हफ्ते अधिक रहने से मिलेगा।