डेंगु से अंधापन का खतरा 


 

मुंबई। समय पर एवं समुचित उपचार नहीं होने पर डेंगु की बीमारी घातक हो सकती है, साथ ही डेंगू वायरस से पीड़ित मरीज की आंखों की रोशनी खोने का खतरा भी हो सकता है। मुंबई में पिछले साल डेंगू से १२ लोगों की मौत हुई थी। चिकित्सकों के मुताबिक मुंबई में तीन मरीजों को डेंगू के वायरस की वजह से अपनी दृष्टि खोनी पड़ी है। मुंबई के चूना भट्टी के एक २० वर्षीय छात्र को डेंगू की बीमारी के बाद दोनों आंखो में मोतियाबिंद हो गया था। कई आपरेशनों के बाद चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत में सुधार हो रहा है। तथा निकट भविष्य में सुधार की संभावना है। मुंबई के पश्चिमी उपनगर का एक २५ वर्षीय युवक अगस्त में डेंगू से पीड़ित हो गया था। डेंगू वायरस के प्रभाव से युवक की कार्निया, रेटीना तथा आप्टिक नर्व संक्रमित हो गयी थी। तथा वह अंधापन का शिकार हो गया। तीसरे मरीज को एक अलग समस्या थी। मरीज की दोनों आंखों की वेंâद्रीय रेटीना की धमनियों में डेंगू संक्रमण के बाद अवरोध पैदा हो गया था एवं रक्त का संचार रूक जाने से ५५ वर्षीय मरीज की आंखों की ज्योति पूरी तरह से चली गयी थी। वह डायविटीज से पीड़ित भी था। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित मच्छर के काटने के बाद डेंगू वायरस रक्त के प्रवाह में शामिल हो जाते हैं तथा विभिन्न अंगों में गुणित वृद्धि करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू वायरस मस्तिष्क तथा लीवर को प्रभावित कर सकते हैं आंखों को संक्रमत करना असामान्य उदाहरण है।